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विदिशा जिला अस्पताल में लापरवाही: गेट पर हुई प्रसूता की डिलीवरी, तीन नर्सिंग अधिकारी निलंबित

Vidisha hospital gate delivery, 3 nursing officers suspended for negligence. विदिशा जिला अस्पताल में प्रसूति वार्ड के मुख्य गेट पर महिला की डिलीवरी होने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। मामले में लापरवाही पाए जाने पर सीएमएचओ ने नर्सिंग अधिकारी मनीषा सातपुते, अरुंधती पंवार और ज्योति कुशवाह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

8 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 841
विदिशा जिला अस्पताल में लापरवाही: गेट पर हुई प्रसूता की डिलीवरी, तीन नर्सिंग अधिकारी निलंबित
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अस्पताल प्रबंधन की बड़ी चूक

विदिशा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और घोर लापरवाही का एक शर्मनाक मामला सामने आया है। अस्पताल के प्रसूति वार्ड के मुख्य गेट पर एक गर्भवती महिला की डिलीवरी हो गई, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए तीन नर्सिंग अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह घटना अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

घटना 2 जुलाई की रात की है, जब सुखवती यादव नामक प्रसूता अस्पताल पहुंची थी। प्रसूति वार्ड के गेट पर ही उसे प्रसव पीड़ा हुई और वहीं उसने बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान अस्पताल के भीतर मौजूद स्टाफ ने न तो महिला की सुध ली और न ही नवजात को संभालने के लिए कोई तत्परता दिखाई। इस पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल की संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

जांच में सामने आई गंभीर लापरवाही

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभागीय जांच कराई गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जब महिला लेबर रूम से बाहर आई, तब ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ ने स्थिति की गंभीरता को नजरअंदाज किया। न तो समय रहते महिला को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और न ही ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों को इस आपातकालीन स्थिति की जानकारी दी गई। नवजात के जन्म के बाद भी उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए कोई कर्मचारी आगे नहीं आया।

सीएमएचओ ने इस मामले को अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मानते हुए नर्सिंग अधिकारी मनीषा सातपुते, अरुंधती पंवार और ज्योति कुशवाह को प्रथम दृष्टया दोषी पाया। इन तीनों के खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि के दौरान इन सभी का मुख्यालय सिविल अस्पताल, गंजबासौदा निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

प्रशासन की पूर्व कार्रवाई और जवाबदेही

इस घटना के बाद से ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई से पूर्व, अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात तीन गार्डों को भी सेवा से हटा दिया गया था। साथ ही, संबंधित सुरक्षा एजेंसी पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। प्रशासन का मानना है कि अस्पताल परिसर में सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति बरती गई यह लापरवाही किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

घटना के बाद नर्सिंग अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उनके द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को विभाग ने असंतोषजनक माना। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए अस्पताल में ड्यूटी रोस्टर और निगरानी प्रणाली को और अधिक सख्त किया जाएगा।

स्वास्थ्य सेवाओं पर उठते सवाल

विदिशा जिला अस्पताल में हुई इस घटना ने आम जनता के बीच स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अविश्वास पैदा किया है। जिला अस्पताल में दूर-दराज के क्षेत्रों से महिलाएं प्रसव के लिए आती हैं, ऐसे में गेट पर डिलीवरी होना अस्पताल की लचर व्यवस्था का प्रमाण है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि केवल निलंबन ही काफी नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए जिससे भविष्य में किसी भी प्रसूता को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। अस्पताल प्रशासन अब अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने और स्टाफ को संवेदनशील बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी कर रहा है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की जवाबदेही और मरीजों के प्रति उनके व्यवहार पर बहस छेड़ दी है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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