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सोनम वांगचुक ने 27 दिन बाद तोड़ा अनशन, सरकार से मिली इन मांगों पर सहमति

Sonam Wangchuk Hunger strike in Gurugram after government assurance. पेपर लीक के खिलाफ अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने 27वें दिन भूख हड़ताल खत्म कर दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुवार रात करीब 12.30 बजे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

24 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 697
सोनम वांगचुक ने 27 दिन बाद तोड़ा अनशन, सरकार से मिली इन मांगों पर सहमति
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27 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद अनशन समाप्त

नीट (NEET) पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ पिछले 27 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। गुरुवार देर रात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। यह कदम सरकार और वांगचुक के बीच हुई लंबी बातचीत के बाद उठाया गया।

वांगचुक ने शुक्रवार सुबह एक वीडियो संदेश के माध्यम से जानकारी दी कि सरकार के साथ पिछले दो दिनों से गहन चर्चा चल रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया है, जिसके बाद उन्होंने आंदोलन को एक नया मोड़ देने का निर्णय लिया। हालांकि, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार की ओर से कोई सहमति नहीं बनी है, लेकिन वांगचुक ने इसे अनशन खत्म करने की अनिवार्य शर्त नहीं माना।

सरकार ने दी ये प्रमुख लिखित गारंटी

सरकार द्वारा दी गई लिखित सहमति में तीन मुख्य बिंदु शामिल हैं। पहला, प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। दूसरा, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाएगी। तीसरा, उन छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा जिन्होंने इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आत्महत्या जैसा दुखद कदम उठाया।

वांगचुक ने बताया कि उनके लिए छात्रों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनके लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं था जितना कि उन छात्रों को कानूनी सुरक्षा दिलाना जो इस आंदोलन का हिस्सा थे। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में अन्य तरीकों से संघर्ष जारी रहेगा, लेकिन फिलहाल अपनी जान बचाना और आंदोलन को आगे ले जाना आवश्यक था।

विपक्षी सांसदों का मिला समर्थन

वांगचुक के इस आंदोलन को व्यापक राजनीतिक समर्थन भी मिला। 22 जुलाई को विपक्षी दलों के करीब 65 सांसदों ने एक संयुक्त पत्र सौंपकर उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की थी। इन सांसदों ने संसद के मानसून सत्र के दौरान नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के मुद्दे को मजबूती से उठाने का भरोसा दिलाया था। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सीपीआई(एम) और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल जाकर वांगचुक से मुलाकात की थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर वांगचुक से डॉक्टरों की सलाह मानने और अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने का आग्रह किया था। पीएम ने यह भी संकेत दिया था कि सरकार पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लाने की दिशा में काम कर रही है और इस पर कैबिनेट में चर्चा की जाएगी।

आंदोलन की पृष्ठभूमि और आगे की राह

सोनम वांगचुक ने 28 जून को जंतर-मंतर से इस अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की शुरुआत की थी। वे इससे पहले भी लद्दाख की मांगों को लेकर लंबे समय तक संघर्ष कर चुके हैं। 2024 में उन्होंने लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने के लिए 21 दिन का अनशन किया था। उनके पिछले आंदोलनों का इतिहास रहा है कि वे अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने में सफल रहे हैं।

हालांकि वांगचुक ने अनशन खत्म कर दिया है, लेकिन अन्य संगठनों ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। वांगचुक का यह संघर्ष देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को एक नई दिशा दे गया है। अब सबकी नजरें संसद के आगामी सत्र पर टिकी हैं, जहां सरकार इन वादों को किस तरह से लागू करती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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