मतदाता सूची से नाम काटने को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के गंभीर आरोप, सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाने का भी दावा
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर विवाद बढ़ गया है। विपक्ष ने नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए हैं, जबकि निर्वाचन आयोग ने कहा है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव के मुद्दे पर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और इस प्रक्रिया से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चुनावी लाभ पहुंच सकता है।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान मतदाता सूची से जुड़े विभिन्न फैसलों पर कम-से-कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, नाम हटाने और बहाल करने तथा मतदाता डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने के लिए किया गया। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि करीब 30 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए और इससे BJP को लाभ पहुंचाने की कोशिश हुई। हालांकि, यह राजनीतिक आरोप है और इसे स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।
विपक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच और SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से बढ़ा विवाद
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची से संबंधित कई फैसलों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ मामलों में दोनों आयुक्तों को फैसलों की प्रक्रिया और जानकारी साझा किए जाने को लेकर सवाल थे।
रिपोर्ट के अनुसार SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने की प्रक्रिया सामने आई है। हालांकि, केवल नाम हटाए जाने की संख्या को किसी राजनीतिक दल को चुनावी लाभ पहुंचने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इंडियन एक्सप्रेस की उसी रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जिन सीटों पर हटाए गए नाम जीत के अंतर से अधिक थे, उनमें BJP और TMC दोनों को सीटें मिली थीं।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग अधिकारियों के बीच सवाल और मतभेद निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक SIR से संबंधित अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए।
यानी एक तरफ विपक्ष इन घटनाओं को चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल के रूप में देख रहा है, वहीं निर्वाचन आयोग इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और अपने फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताता है।
अब सवाल जांच और पारदर्शिता का
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर उठे विवाद में मुख्य सवाल यह है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही, क्या निर्धारित नियमों का पालन हुआ और क्या किसी राजनीतिक दल को इसका वास्तविक चुनावी लाभ मिला।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!