भोपाल मास्टर प्लान: सीलिंग से राहत की उम्मीदों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख सख्त, ड्राफ्ट से नहीं बदलेगी स्थिति
भोपाल के रहवासी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सुनवाई की। इसके बाद सरकार मास्टर प्लान के ड्राफ्ट जारी करने की तैयारी कर रही है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

भोपाल मास्टर प्लान और सीलिंग का कानूनी पेच
भोपाल में आवासीय इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों और सीलिंग की कार्रवाई को लेकर व्यापारियों की निगाहें नए मास्टर प्लान पर टिकी हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट आने से सीलिंग की कार्रवाई पर कोई तात्कालिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि नए ड्राफ्ट में लैंडयूज बदलने का कोई प्रस्ताव आता भी है, तो भी आवासीय क्षेत्रों में चल रही दुकानें स्वतः वैध नहीं मानी जाएंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर को दिए अपने आदेश में भोपाल के संदर्भ में कड़े निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार ने कोर्ट को सूचित किया था कि नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार है और इसे सार्वजनिक कर आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की जानी है। सरकार ने कोर्ट से इसके प्रकाशन की अनुमति मांगी थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण शर्तें भी जोड़ दी गई हैं।
अदालत की अनुमति के बिना अंतिम निर्णय नहीं
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, कोर्ट ने ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति तो दी है, लेकिन अंतिम रूप देने के लिए न्यायालय की पूर्वानुमति अनिवार्य कर दी है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट नए मास्टर प्लान को मंजूरी नहीं देता, तब तक मौजूदा नियमों के आधार पर ही सीलिंग की कार्रवाई जारी रहेगी। ड्राफ्ट में प्रस्तावित बदलावों को कानूनी मान्यता तब तक नहीं मिलेगी जब तक पूरी प्रक्रिया न्यायिक समीक्षा से नहीं गुजर जाती।
अदालत ने यह भी साफ किया है कि किसी भी भवन के मालिकाना हक या अन्य विवादों के लंबित होने का बहाना बनाकर सीलिंग की कार्रवाई को रोका नहीं जा सकता। यदि कोई निर्माण कार्य मंजूर नक्शे के विपरीत है या आवंटन के उद्देश्यों का उल्लंघन करता है, तो प्रशासन के पास उसे सील करने या ध्वस्त करने का पूरा अधिकार है। बिना अनुमति के हुए निर्माणों पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक
न्यायालय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो क्षेत्र स्पष्ट रूप से आवासीय श्रेणी में आते हैं, वहां किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि ऐसे क्षेत्रों में दुकानें या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित पाए जाते हैं, तो उन्हें बिना किसी देरी के सील किया जाना चाहिए। नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट के प्रकाशन के बाद भी इन क्षेत्रों में कार्रवाई मौजूदा बिल्डिंग बायलॉज और मास्टर प्लान के नियमों के तहत ही होगी।
हालांकि, कोर्ट ने उन क्षेत्रों के लिए थोड़ी राहत के संकेत दिए हैं जहां जमीन का उपयोग आवासीय या व्यावसायिक के रूप में स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में मिश्रित उपयोग (Mixed Land Use) के पहलुओं पर विचार किया जा सकता है, लेकिन जब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं होता, तब तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
चुनिंदा कार्रवाई पर कोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने भोपाल में सीलिंग की प्रक्रिया में बरती जा रही अनियमितताओं की ओर इशारा किया। कोर्ट को बताया गया कि कई मामलों में परिसरों को सील करने के कुछ घंटों या दिनों बाद ही उन्हें बिना किसी ठोस कारण के खोल दिया जाता है। इस पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि चुनिंदा या भेदभावपूर्ण कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को निर्धारित की गई है। भोपाल के व्यापारी वर्ग के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उनकी उम्मीदें मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर टिकी हैं, जबकि प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों का पालन करना है। फिलहाल शहर में सीलिंग को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और प्रशासन की आगामी कार्रवाई कोर्ट के आदेशों के दायरे में ही संचालित होगी।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!