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राम मंदिर और धर्मगुरुओं पर रामपाल की विवादित टिप्पणी, बीजेपी नेता की मौजूदगी में उठाए सवाल

हमारे धर्मगुरु आजतक हमें मूर्ख बना रहे हैं। ये कहते हैं कि हमने मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा कर दी।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

16 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 342
राम मंदिर और धर्मगुरुओं पर रामपाल की विवादित टिप्पणी, बीजेपी नेता की मौजूदगी में उठाए सवाल
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राम मंदिर और धर्मगुरुओं पर रामपाल का विवादास्पद बयान

हाल ही में जेल से रिहा हुए सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में हुई कथित चोरी और देश के प्रमुख धर्मगुरुओं को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की है। सोनीपत के धनाना स्थित आश्रम में बीजेपी प्रवक्ता नेहा धवन की मौजूदगी में दिए गए इस बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रामपाल ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और वहां की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे लोगों को मूर्ख बनाने का जरिया बताया है।

रामपाल ने अपने संबोधन में कहा कि यदि मूर्ति में वास्तव में प्राण होते, तो मंदिर में चोरी की घटना संभव नहीं थी। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भगवान राम के पास धनुष-बाण था, फिर भी वे अपनी संपत्ति की रक्षा नहीं कर सके। उन्होंने तर्क दिया कि धर्मगुरुओं द्वारा प्राण प्रतिष्ठा का दावा केवल श्रद्धालुओं को गुमराह करने का एक तरीका है। इस दौरान मंच पर मौजूद बीजेपी नेता नेहा धवन मुस्कुराती हुई नजर आईं, जिसके बाद से यह वीडियो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

देश के प्रमुख संतों पर साधा निशाना

अपने वीडियो संदेश में रामपाल ने प्रेमानंद महाराज, धीरेंद्र शास्त्री, श्रीश्री रविशंकर और देवकीनंदन ठाकुर जैसे प्रसिद्ध धर्मगुरुओं की तस्वीरें प्रदर्शित करते हुए उन्हें 'ढोंगी' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी लोग धर्म के नाम पर आम जनता को भ्रमित कर रहे हैं। रामपाल का दावा है कि उनके आश्रम में चढ़ावे का सारा पैसा दान कर दिया जाता है, इसलिए वहां चोरी जैसी कोई स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

बता दें कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मुद्दा पिछले कुछ समय से सुर्खियों में है। सपा नेता पवन पांडेय ने मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे में हेराफेरी का आरोप लगाया था, जिसके बाद से इस मामले की सीबीआई जांच की मांग भी उठती रही है। मंदिर प्रबंधन की ओर से इस पर कोई स्पष्ट जवाब न मिलने के कारण विवाद और गहरा गया है।

रामपाल का विवादित अतीत और कानूनी संघर्ष

सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल लंबे समय तक कानूनी विवादों में घिरे रहे हैं। वर्ष 2006 में करौथा आश्रम विवाद के दौरान आर्य समाजियों और उनके समर्थकों के बीच हुई हिंसक झड़प में एक व्यक्ति की जान चली गई थी। इसके बाद 2014 में बरवाला आश्रम में पुलिस के साथ हुए खूनी संघर्ष ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। उस दौरान आश्रम के भीतर पांच महिलाओं और एक बच्चे की मौत हो गई थी, जिसके बाद रामपाल को देशद्रोह और हत्या जैसे गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।

रामपाल को 2018 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन 2025 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने उनकी सजा को निलंबित कर दिया। लगभग 11 साल, 4 महीने और 24 दिन जेल में बिताने के बाद, 10 अप्रैल 2026 को उन्हें हिसार की सेंट्रल जेल से रिहा किया गया। रिहाई के बाद से ही वे सोनीपत के धनाना आश्रम में रह रहे हैं और लगातार अपने बयानों के जरिए चर्चा में बने हुए हैं।

आगे की स्थिति

रामपाल के इस हालिया बयान ने एक बार फिर धार्मिक भावनाओं और तर्क के बीच बहस को जन्म दे दिया है। हालांकि, अभी तक किसी भी प्रमुख धार्मिक संगठन या मंदिर ट्रस्ट की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पुलिस और प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि रामपाल के समर्थकों की बड़ी संख्या को देखते हुए उनके बयानों से कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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