मध्य प्रदेश: ओबीसी आरक्षण विवाद में फंसा हजारों युवाओं का भविष्य, हाईकोर्ट में शुरू हुई नियमित सुनवाई
MP High Court OBC reservation hearing updates for pending recruitment exam results. मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण मामले में एक बार फिर जबलपुर हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू हो गई है। इस विवाद की वजह से हजारों पद खाली हैं और हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस कानूनी पेच के कारण राज्य की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में चयनित हजारों अभ्यर्थी पिछले कई वर्षों से नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं। 87:13 के फॉर्मूले के तहत करीब 11 हजार पद होल्ड पर रखे गए हैं, जिससे युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।
नौकरी के इंतजार में मजदूरी करने को मजबूर युवा
सरकारी नौकरी की आस में कई युवाओं ने अपने निजी करियर और अन्य अवसरों को छोड़ दिया था, लेकिन अब वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। बुरहानपुर के प्रदुम्न जैसे कई अभ्यर्थी हैं जिन्होंने चयन होने के बावजूद नियुक्ति न मिलने पर खेतों में मजदूरी करने का रास्ता चुना है। प्रदुम्न ने बताया कि उन्होंने सरकारी नौकरी के लिए अपनी निजी नौकरी छोड़ दी थी, लेकिन आज वे परिवार का पेट पालने के लिए पिता के साथ खेतों में काम कर रहे हैं।
जबलपुर की आरती पटेल की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की, लेकिन रिजल्ट होल्ड होने के कारण वे आज भी अतिथि शिक्षक के रूप में काम कर रही हैं। इसी तरह, पुलिस आरक्षक भर्ती में चयनित रविंद्र सिंह गुर्जर और वर्षा लोधी जैसे कई अभ्यर्थी हैं, जो अपनी योग्यता साबित करने के बाद भी मजदूरी और दिहाड़ी के काम करने को मजबूर हैं। वर्षा लोधी ने बताया कि आर्थिक तंगी इतनी अधिक है कि उन्हें घर चलाने के लिए जंगल से लकड़ियां तक लानी पड़ती हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और हाईकोर्ट में सुनवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में सभी संबंधित याचिकाओं को जबलपुर हाईकोर्ट वापस भेज दिया था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि इस संवेदनशील मामले को 90 दिनों के भीतर विशेष बेंच गठित कर निपटाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि छात्रों के भविष्य और राज्य की नौकरियों से जुड़े इस मामले में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में, जून 2026 में जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की एक नई विशेष बेंच का गठन किया गया। 15 जुलाई 2026 से इस बेंच ने मामले की नियमित सुनवाई शुरू कर दी है। कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिए हैं कि इस विवाद से जुड़ी सभी 91 फाइलों को एक साथ संकलित किया जाए ताकि सुनवाई में कोई बाधा न आए।
क्या है 87:13 का फॉर्मूला
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण विवाद के चलते राज्य सरकार ने भर्ती परीक्षाओं के लिए एक अंतरिम व्यवस्था लागू की थी, जिसे 87:13 का फॉर्मूला कहा जाता है। इसके तहत 87 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां की जा रही हैं, जबकि 13 प्रतिशत पदों को ओबीसी आरक्षण के अंतिम निर्णय तक होल्ड पर रखा गया है। इस व्यवस्था के कारण हजारों चयनित उम्मीदवार अपनी नियुक्ति की प्रतीक्षा में वर्षों से भटक रहे हैं।
हाईकोर्ट की विशेष बेंच ने अब दोनों पक्षों के वकीलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे बिना किसी ठोस कारण के स्थगन की मांग न करें। कोर्ट का प्रयास है कि बहस को केवल कानूनी और संवैधानिक बिंदुओं तक सीमित रखकर जल्द से जल्द कोई निष्कर्ष निकाला जाए। यह फैसला न केवल उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है जो नियुक्ति की बाट जोह रहे हैं, बल्कि यह राज्य की भविष्य की आरक्षण नीति और भर्ती प्रक्रिया की दिशा भी तय करेगा।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
