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इंदौर की आंगनवाड़ियों में परोसा जा रहा 'कुपोषण', हर महीने 100 बच्चे पहुंच रहे अस्पताल

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

15 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 434
इंदौर की आंगनवाड़ियों में परोसा जा रहा 'कुपोषण', हर महीने 100 बच्चे पहुंच रहे अस्पताल
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आंगनवाड़ियों की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

इंदौर जिले की आंगनवाड़ियों में बच्चों को मिलने वाला सरकारी भोजन पोषण के बजाय कुपोषण का कारण बनता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में हर महीने 80 से 100 बच्चों को गंभीर स्थिति के चलते पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराना पड़ रहा है। यह स्थिति आंगनवाड़ियों में परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।

नियमों के अनुसार, स्व-सहायता समूहों द्वारा दिए जाने वाले आहार में 15 से 20 ग्राम प्रोटीन और 500 कैलोरी अनिवार्य है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश केंद्रों पर भोजन बेहद अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार किया जा रहा है। पोषण ट्रैकर एप के डेटा के मुताबिक, जिले में 0 से 5 वर्ष की आयु के 44 हजार बच्चे नाटेपन और 25 हजार बच्चे कम वजन की समस्या से जूझ रहे हैं।

आंकड़े और प्रशासनिक लापरवाही

महू-मानपुर स्थित एनआरसी के आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 175 बच्चे कुपोषण का शिकार होकर वहां पहुंचे। यह संख्या दर्शाती है कि आंगनवाड़ियों में बच्चों को मिलने वाला पोषण आहार मानकों के अनुरूप नहीं है। कई स्थानों पर कच्ची रोटियां और पानी जैसी दाल परोसे जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं, जो बच्चों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।

जब इस मामले में जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है और अब समूहों को सख्त निर्देश दिए जाएंगे। वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त को जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि समूहों की लापरवाही पाई जाती है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन ने शुरू की जांच प्रक्रिया

मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर तीन अलग-अलग जांच दल गठित किए गए हैं, जो आंगनवाड़ियों और वहां के किचन का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान कई केंद्रों पर गंभीर खामियां पाई गई हैं, जिसके आधार पर अब जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को किचन और आंगनवाड़ी परिसर की व्यवस्था में सुधार करने और पोषण आहार की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। प्रशासन का दावा है कि रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले समूहों और अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

आगे की राह और चुनौतियां

भविष्य में इस समस्या से निपटने के लिए केवल निरीक्षण ही काफी नहीं होगा। आंगनवाड़ियों में भोजन बनाने वाले समूहों की जवाबदेही तय करना और नियमित रूप से आहार की गुणवत्ता की जांच करना अनिवार्य है। जब तक जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत नहीं होगा, तब तक बच्चों के स्वास्थ्य के साथ हो रहा यह खिलवाड़ रोकना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन द्वारा गठित टीमें अपनी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकालती हैं और क्या वास्तव में उन समूहों पर कार्रवाई होती है जो बच्चों के भविष्य को खतरे में डाल रहे हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों की मांग है कि बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच सार्वजनिक की जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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