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गया में बोरवेल में गिरा 3 साल का मासूम, 7 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया

गयाजी में एक तीन साल का मासूम बच्चा 30 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया। जेसीबी मशीनों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन किया जा रहा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

17 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
गया में बोरवेल में गिरा 3 साल का मासूम, 7 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया
मूल स्रोत

खेलते समय बोरवेल में गिरा बच्चा

बिहार के गया जिले के गुरपा थाना क्षेत्र के रंगू नगर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। तीन साल का पीयूष कुमार खेलते समय घर के पास खुले पड़े एक बोरवेल में गिर गया। यह बोरवेल करीब 30 फीट गहरा था, जिसमें बच्चा फंस गया। घटना गुरुवार शाम करीब 7:30 बजे की है, जब पीयूष के हाथ में मोबाइल था और वह बोरवेल के पास खेल रहा था। पैर फिसलने के कारण वह सीधे अंदर चला गया।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों में हड़कंप मच गया और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। परिजनों की चीख-पुकार के बीच स्थानीय पुलिस और प्रशासन को तुरंत सूचित किया गया। बोरवेल का ऊपरी हिस्सा 10 इंच चौड़ा था, जिससे बच्चा आसानी से अंदर चला गया, लेकिन गहराई में जाकर उसका शरीर फंस गया। राहत की बात यह रही कि बच्चे का सिर ऊपर की ओर था, जिससे उसे सांस लेने में मदद मिल रही थी।

NDRF और SDRF का सफल रेस्क्यू ऑपरेशन

बचाव कार्य के लिए पटना से NDRF और SDRF की टीमों को बुलाया गया। रात करीब 12:30 बजे NDRF की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने बोरवेल के समानांतर गड्ढा खोदने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद जवानों ने हुक तकनीक का इस्तेमाल किया। एक विशेष हुकनुमा डिवाइस को बोरवेल में डालकर बच्चे के कपड़ों में फंसाया गया और बेहद सावधानी से उसे ऊपर खींचा गया। करीब 7 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पीयूष को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

रेस्क्यू के दौरान बच्चा काफी डरा हुआ था। उसे हिम्मत देने के लिए उसकी बड़ी मां को बोरवेल के पास बुलाया गया, जिन्होंने उसे बिस्कुट का लालच देकर शांत रखने की कोशिश की। NDRF के असिस्टेंट कमांडेंट संतोष ने बताया कि बच्चे के घुटने और ऊपरी शरीर एक साथ फंस गए थे, जिसके कारण बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण था। ऑक्सीजन की निरंतर सप्लाई ने इस ऑपरेशन में बड़ी भूमिका निभाई।

प्रशासन की लापरवाही और सुरक्षा पर सवाल

इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही भी उजागर हुई। मौके पर लाए गए पांच ऑक्सीजन सिलेंडरों में से चार खाली निकले। साथ ही, शुरुआत में मेडिकल टीम के नाम पर केवल एक नर्स को भेजा गया था, जिसे आपातकालीन स्थितियों का अनुभव नहीं था। ग्रामीणों ने प्रशासन की इस सुस्ती पर भारी आक्रोश व्यक्त किया। एडीएम स्तर के अधिकारी भी घटना के कई घंटे बाद मौके पर पहुंचे।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह बोरवेल पीएचईडी (PHED) द्वारा नल-जल योजना के तहत करीब एक महीने पहले खोदा गया था। पानी न मिलने के कारण इसे अधूरा छोड़ दिया गया था और केवल बोरे से ढंक दिया गया था। बोरवेल को खुला छोड़ने की लापरवाही ने एक मासूम की जान जोखिम में डाल दी। घटना के बाद विभाग ने आनन-फानन में इलाके के अन्य खुले बोरवेलों को ढंकने का काम शुरू किया।

बच्चा सुरक्षित, इलाज जारी

बोरवेल से बाहर निकलने के बाद पीयूष को तुरंत फतेहपुर सीएचसी ले जाया गया। हालांकि बच्चा सुरक्षित है, लेकिन उसके पैर में सूजन है और वह डॉक्टरों की निगरानी में है। रेस्क्यू के दौरान पीयूष अपने हाथ में मोबाइल थामे रहा, जो बाहर निकालते समय नीचे गिर गया। फिलहाल, बच्चा खतरे से बाहर है और परिवार ने राहत की सांस ली है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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