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बालाघाट में मानसून की जोरदार वापसी: वारासिवनी में 16 इंच बारिश, धान की बुआई ने पकड़ी रफ्तार

Balaghat rain record broken, sowing begins for kharif crop. बालाघाट जिले में लगातार हो रही बारिश ने पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मानसून की शुरुआत में सूखे जैसे हालात के बाद, चार दिनों की वर्षा से नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 876
बालाघाट में मानसून की जोरदार वापसी: वारासिवनी में 16 इंच बारिश, धान की बुआई ने पकड़ी रफ्तार
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मानसून की सक्रियता से बालाघाट में बदली तस्वीर

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में मानसून की सक्रियता ने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। मानसून के शुरुआती दौर में सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे किसानों के लिए पिछले चार दिनों की मूसलाधार बारिश संजीवनी बनकर आई है। इस वर्षा से जिले की नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे जल संकट की आशंका कम हो गई है और कृषि गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है।

आंकड़ों के अनुसार, 5 जुलाई तक जिले में कुल 251 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 211 मिलीमीटर के आंकड़े से काफी अधिक है। हालांकि, जिले की कुल औसत वर्षा का लक्ष्य अभी भी पूरा होना बाकी है, लेकिन हालिया बारिश ने किसानों में नई उम्मीद जगा दी है।

वारासिवनी में सर्वाधिक वर्षा, बुआई कार्य में तेजी

जिले में बारिश का वितरण असमान रहा है। वारासिवनी तहसील में सबसे अधिक 401 मिलीमीटर (करीब 16 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जबकि बिरसा तहसील में सबसे कम 103 मिलीमीटर वर्षा हुई है। पिछले 24 घंटों के दौरान जिले में औसतन सवा इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है, जिससे खेतों में नमी का स्तर बढ़ गया है।

बारिश के अभाव में जो बुआई कार्य ठप पड़ा था, उसने अब गति पकड़ ली है। सिंचित क्षेत्रों में धान की नर्सरी तैयार होने के बाद अब रोपाई का काम जोर-शोर से चल रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि असिंचित क्षेत्रों में भी अगले 10 से 15 दिनों में बुआई का कार्य सुचारू रूप से शुरू हो जाएगा, क्योंकि वहां भी नर्सरी लगाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

3 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान का लक्ष्य

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष बालाघाट जिले में लगभग 3 लाख 11 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की फसल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए करीब 18 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुपर सीडर के माध्यम से डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) पद्धति से बुआई की जा चुकी है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश में देरी के बावजूद फसल के कुल उत्पादन पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।

हालांकि, खेती की लागत में वृद्धि किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। खाद की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब मजदूरों की मजदूरी में भी इजाफा हो गया है, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। कई किसान इसे घाटे का सौदा मानकर चिंतित हैं, क्योंकि बढ़ती महंगाई ने उनकी लागत को काफी बढ़ा दिया है।

तहसीलवार वर्षा का विवरण

जिले के अन्य क्षेत्रों में भी बारिश का असर देखा गया है। बालाघाट तहसील में 389 मिमी, बैहर में 332 मिमी, लांजी में 199 मिमी, कटंगी में 140 मिमी, किरनापुर में 339 मिमी, खैरलांजी में 134 मिमी, लालबर्रा में 272 मिमी, परसवाड़ा में 231 मिमी और तिरोड़ी में 221 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने 7 जुलाई तक जिले में और अच्छी बारिश होने की संभावना जताई है, जो खरीफ की फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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