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इलाहाबाद हाईकोर्ट: नवनिर्मित अधिवक्ता चैंबर्स के रखरखाव के लिए 24 करोड़ के अनुदान की सिफारिश

Allahabad High Court seeks UP govt budgetary grant for advocate building electricity and maintenance. इलाहाबाद हाईकोर्ट के महानिबंधक ने नवनिर्मित अधिवक्ता चैंबर्स और मल्टीलेवल पार्किंग भवन के बिजली बिल व रखरखाव खर्च की भरपाई के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से बजटीय अनुदान देने की सिफारिश की है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

6 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1.3K
इलाहाबाद हाईकोर्ट: नवनिर्मित अधिवक्ता चैंबर्स के रखरखाव के लिए 24 करोड़ के अनुदान की सिफारिश
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हाईकोर्ट प्रशासन ने राज्य सरकार को लिखा पत्र

इलाहाबाद हाईकोर्ट के महानिबंधक ने नवनिर्मित अधिवक्ता चैंबर्स और मल्टीलेवल पार्किंग के संचालन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से वित्तीय सहायता की मांग की है। हाईकोर्ट प्रशासन ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर प्रति वर्ष 24 करोड़ रुपये के बजटीय अनुदान की सिफारिश की है। यह राशि मुख्य रूप से नवनिर्मित भवनों के बिजली बिल और उनके रखरखाव के खर्चों को पूरा करने के लिए मांगी गई है।

महानिबंधक मनजीत सिंह श्योरण द्वारा भेजे गए इस पत्र का मुख्य उद्देश्य यह है कि इन सुविधाओं के रखरखाव का आर्थिक बोझ अधिवक्ताओं पर न पड़े। इस कदम को वकीलों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो लंबे समय से चैंबर्स के आवंटन और उनसे जुड़े खर्चों को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त करते रहे हैं।

बार एसोसिएशन की मांग और मुख्यमंत्री का रुख

इस मामले की शुरुआत 12 फरवरी 2026 को हुई थी, जब हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस अनुदान की मांग की थी। बार एसोसिएशन का तर्क था कि नवनिर्मित चैंबर्स और मल्टीलेवल पार्किंग के भारी-भरकम बिजली बिल और रखरखाव का खर्च अधिवक्ताओं के लिए वहन करना कठिन होगा।

बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने 7 जून 2026 को मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात भी की थी। सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने इस मांग के प्रति सकारात्मक रुख अपनाया था। इसी सकारात्मक संकेत के बाद, बार एसोसिएशन ने 3 जुलाई 2026 को मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि वे इस प्रस्ताव को अपनी सिफारिश के साथ राज्य सरकार को भेजें।

अधिवक्ताओं के लिए राहत की उम्मीद

वर्तमान में नवनिर्मित अधिवक्ता चैंबर्स के आवंटन की प्रक्रिया चल रही है। लंबे समय से अधिवक्ता चैंबर्स के लिए लिए जाने वाले किराये का विरोध कर रहे थे। वकीलों की मुख्य मांग यह रही है कि एक निश्चित राशि जमा कराकर उन्हें चैंबर्स आवंटित किए जाएं, न कि उनसे मासिक किराया लिया जाए। महानिबंधक द्वारा सरकार को भेजी गई यह सिफारिश इस विवाद को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

हाईकोर्ट प्रशासन ने अपने पत्र में राज्य सरकार से आग्रह किया है कि इस पूरे मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष सहानुभूतिपूर्वक प्रस्तुत किया जाए ताकि इस पर जल्द से जल्द निर्णय लिया जा सके। इस पत्र की प्रतियां बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडे और एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सग़ीर अहमद को भी भेजी गई हैं।

आगे की प्रक्रिया

अब सबकी निगाहें उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय पर टिकी हैं। यदि सरकार 24 करोड़ रुपये के इस वार्षिक अनुदान को मंजूरी देती है, तो यह इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं के लिए एक बड़ी वित्तीय राहत होगी। इससे न केवल चैंबर्स के रखरखाव की समस्या हल होगी, बल्कि वकीलों और प्रशासन के बीच चल रहे किराये संबंधी विवाद का भी समाधान निकल सकता है।

प्रशासनिक स्तर पर इस सिफारिश के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार की ओर से इस पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल, अधिवक्ता समुदाय इस पहल को सकारात्मक मानकर सरकार के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहा है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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