NEET-2026 परीक्षा रद्द होने के मामले में बड़ा खुलासा, पेपर लीक नेटवर्क की जांच में जुटीं एजेंसियां

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NEET-2026 परीक्षा रद्द होने के मामले में बड़ा खुलासा, देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-2026 को रद्द किए जाने के बाद अब कथित पेपर लीक मामले में कई अहम जानकारियां सामने आ रही हैं। जांच एजेंसियों और सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क की जड़ें महाराष्ट्र के नासिक स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस तक पहुंच सकती हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जांच की कमान संभाल ली है और विभिन्न राज्यों में फैले नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, कथित पेपर लीक को छिपाने के लिए इसे “गेस पेपर” का नाम दिया गया था, ताकि शक कम हो और जांच एजेंसियों की नजर से मामला बचा रहे। दावा किया जा रहा है कि परीक्षा से करीब तीन सप्ताह पहले यह तथाकथित “गेस पेपर” राजस्थान समेत करीब 10 राज्यों में प्रसारित किया गया था। हालांकि, जांच एजेंसियां अभी इस बात की पुष्टि करने में जुटी हैं कि वायरल सामग्री वास्तव में मूल प्रश्नपत्र थी या नहीं।

मंगलवार रात इस मामले की जांच में बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया, जब CBI की टीम जयपुर पहुंची और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) मुख्यालय में अधिकारियों से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि CBI अब SOG से जुटाए गए दस्तावेज, डिजिटल सबूत, हिरासत में लिए गए लोगों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाएगी।

जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि नासिक से गिरफ्तार शुभम खैरनार और हरियाणा के डॉ. यश यादव को इस कथित नेटवर्क का प्रमुख हिस्सा माना जा रहा है। आरोप है कि प्रिंटिंग प्रेस से प्रश्नपत्र लीक कर पहले पुणे में बेचा गया और फिर गुरुग्राम के जरिए इसका नेटवर्क अन्य राज्यों तक फैलाया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है।

SOG की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि राजस्थान के जयपुर के दो भाइयों—दिनेश और मांगीलाल—ने कथित रूप से सबसे पहले यह पेपर खरीदा था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में गुरुग्राम में सक्रिय एक गैंग को बड़ी रकम देकर यह सौदा किया गया था। फिलहाल, इन सभी पहलुओं की वित्तीय और डिजिटल जांच की जा रही है।

मामले में राजस्थान के सीकर जिले का नाम भी सामने आया है। जांच एजेंसियों ने कंसल्टेंट राकेश मंडावरिया समेत कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। आरोप है कि कथित प्रश्नपत्र हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और असम तक पहुंचाया गया। हालांकि, एजेंसियां इस नेटवर्क की वास्तविक पहुंच और भूमिका की पुष्टि के लिए तकनीकी साक्ष्य खंगाल रही हैं।

वहीं, सीकर से कुछ छात्रों को भी जांच के दायरे में लाया गया है। आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर गिरोह से जुड़े लोगों के माध्यम से परीक्षा सामग्री प्राप्त की थी। SOG ने कुछ संदिग्धों को आगे की जांच के लिए CBI को सौंप दिया है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि मामले में सभी आरोप जांच के अधीन हैं और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक किसी को दोषी नहीं माना जा सकता।

NEET-2026 परीक्षा रद्द होने से लाखों छात्रों और अभिभावकों में चिंता और नाराजगी का माहौल है। छात्र अब नई परीक्षा तिथि और पारदर्शी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। वहीं, केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच कर दोषियों तक पहुंचने का दबाव बढ़ता जा रहा है।

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