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सुपौल: टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 182 मरीजों को मिला पोषण किट, डीएम ने की जनभागीदारी की अपील

Supaul TB Mukt Bharat campaign food distribution drive for patients. सदर अस्पताल सुपौल स्थित जिला यक्ष्मा केंद्र में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत सोमवार को यक्ष्मा (टीबी) रोगियों के बीच निक्षय मित्रों के सहयोग से खाद्य सामग्री (फूड बास्केट) वितरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 100 TB मरीजों को सोयाबीन, चावल, दाल सहित पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई, ताकि उपचार के साथ उन्हें बेहतर पोषण भी मिल सके।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

20 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 1.1K
सुपौल: टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 182 मरीजों को मिला पोषण किट, डीएम ने की जनभागीदारी की अपील
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सुपौल जिले में टीबी (यक्ष्मा) के खिलाफ छेड़ी गई जंग को तेज करते हुए जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सदर अस्पताल स्थित जिला यक्ष्मा केंद्र में सोमवार को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें टीबी से ग्रसित 182 मरीजों को पोषण युक्त खाद्य सामग्री (फूड बास्केट) वितरित की गई। यह पहल 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के अंतर्गत की गई है, जिसका उद्देश्य मरीजों के उपचार के साथ-साथ उनके बेहतर स्वास्थ्य और पोषण को सुनिश्चित करना है।

मरीजों के लिए पौष्टिक आहार की उपलब्धता

वितरित की गई फूड बास्केट में सोयाबीन, चावल और दाल जैसी आवश्यक पौष्टिक सामग्री शामिल की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी के उपचार के दौरान दवाओं के साथ-साथ संतुलित आहार का सेवन रिकवरी की गति को काफी बढ़ा देता है। निक्षय मित्रों के सहयोग से आयोजित इस वितरण समारोह में बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन शामिल हुए, जिन्हें समय पर दवा लेने और नियमित जांच कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी सावन कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत अभियान को धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार के मुख्य सचिव स्वयं इस अभियान की निरंतर समीक्षा कर रहे हैं, जिससे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी में सुधार आया है।

स्क्रीनिंग और जांच का दायरा बढ़ा

डीएम ने जानकारी दी कि सुपौल के सभी क्षेत्रों में टीबी स्क्रीनिंग का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की रणनीति केवल संक्रमित व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों की भी जांच की जा रही है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य संक्रमण के प्रसार को समय रहते रोकना है। सिविल सर्जन डॉ. बाबू साहब झा के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरी सक्रियता के साथ मरीजों की पहचान और उपचार में जुटी हुई हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है, बशर्ते मरीज अपनी दवा का कोर्स बीच में न छोड़ें। नियमित दवा और पौष्टिक भोजन ही इस बीमारी को जड़ से खत्म करने का एकमात्र प्रभावी तरीका है। प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी मरीज संसाधनों के अभाव में इलाज से वंचित न रहे।

जनभागीदारी से टीबी मुक्त सुपौल का लक्ष्य

जिलाधिकारी ने समाज के प्रबुद्ध वर्ग, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से 'निक्षय मित्र' बनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रयासों के साथ जब जनभागीदारी जुड़ती है, तभी किसी भी अभियान को पूर्ण सफलता मिलती है। निक्षय मित्र के रूप में लोग मरीजों को गोद लेकर उनके पोषण और स्वास्थ्य देखभाल में अपना योगदान दे सकते हैं।

आगामी शनिवार को भी सिविल सर्जन के नेतृत्व में एक और वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें शेष मरीजों को पोषण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य जिले को पूरी तरह टीबी मुक्त बनाना है, जिसके लिए निरंतर जांच, उपचार और जागरूकता कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहेगा। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, निक्षय मित्र और स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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