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सोनीपत में पराली प्रबंधन के लिए विशेष प्रोटेक्शन फोर्स तैनात, यलो जोन के गांवों पर रहेगी पैनी नजर

सोनीपत में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के चेयरमैन राजेश वर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उपायुक्तों के साथ बैठक की। उन्होंने धान की पराली जलाने और वायु प्रदूषण रोकने के इंतजामों की समीक्षा की।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

26 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
सोनीपत में पराली प्रबंधन के लिए विशेष प्रोटेक्शन फोर्स तैनात, यलो जोन के गांवों पर रहेगी पैनी नजर
मूल स्रोत

पराली जलाने पर लगाम लगाने के लिए सोनीपत प्रशासन सख्त

हरियाणा के सोनीपत जिले में धान की कटाई के सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के चेयरमैन राजेश वर्मा द्वारा हाल ही में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद, सोनीपत में पराली प्रबंधन को लेकर कई कड़े कदम उठाए गए हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना और किसानों को पराली जलाने के बजाय उसके वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करना है।

उपायुक्त नेहा सिंह ने बताया कि जिले में निगरानी व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया है। पिछले वर्षों के आंकड़ों के आधार पर जिन गांवों में पराली जलाने की अधिक घटनाएं सामने आई थीं, उन्हें 'यलो जोन' के रूप में चिन्हित किया गया है। इन संवेदनशील इलाकों में निगरानी के लिए विशेष नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं। प्रत्येक नोडल अधिकारी को 50 किसानों के समूह पर नजर रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।

प्रोटेक्शन फोर्स का गठन और निगरानी तंत्र

पराली जलाने की घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई करने के लिए जिला, उपमंडल और ब्लॉक स्तर पर 'पराली प्रोटेक्शन फोर्स' का गठन किया गया है। इस फोर्स में राजस्व विभाग, कृषि विभाग और पुलिस के अधिकारियों व कर्मचारियों को शामिल किया गया है। यह टीमें अपने आवंटित क्षेत्रों में लगातार गश्त करेंगी और सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी। इसके अलावा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक कार्यालय में एक विशेष डैशबोर्ड स्थापित किया गया है, जिससे पराली जलाने से संबंधित गतिविधियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पराली प्रबंधन के लिए जिले में पर्याप्त कृषि यंत्र और संसाधन उपलब्ध हैं। किसानों को इन यंत्रों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सरकार की ओर से धान के अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए 1200 रुपये प्रति एकड़ की अनुदान राशि भी प्रदान की जा रही है, ताकि किसानों पर आर्थिक बोझ न पड़े।

नियम तोड़ने पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई किसान पराली जलाते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें न केवल जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि संबंधित किसान के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण कदम के रूप में, ऐसे किसानों के राजस्व रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' की जाएगी। इस एंट्री के कारण संबंधित किसान अगले दो वर्षों तक अपनी फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी मंडियों में बेचने के लिए पात्र नहीं होगा।

उपायुक्त ने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य केवल दंड देना नहीं है, बल्कि किसानों को जागरूक करना है। इस दिशा में गांवों के साथ-साथ स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। कृषि विभाग की टीमें किसानों से सीधा संवाद कर उन्हें पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन के लाभ बता रही हैं।

पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में आमजन की भागीदारी को भी प्रशासन ने अनिवार्य बताया है। बैठक में कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. बलवंत सहारन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में पराली प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और किसी भी प्रकार की कोताही न बरतें।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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