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शिवपुरी: सर्पदंश से चार साल की मासूम की मौत, अस्पताल से शव लेकर झाड़-फूंक के लिए भागे परिजन

Shivpuri snake bite incident update. शिवपुरी के शासकीय तात्याटोपे राज्य शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षण महाविद्यालय (फिजिकल कॉलेज) परिसर में सर्पदंश से चार वर्षीय बच्ची की मौत हो गई।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

8 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 1.3K
शिवपुरी: सर्पदंश से चार साल की मासूम की मौत, अस्पताल से शव लेकर झाड़-फूंक के लिए भागे परिजन
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मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां सर्पदंश के कारण चार साल की मासूम बच्ची की जान चली गई। घटना शहर के शासकीय तात्याटोपे राज्य शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षण महाविद्यालय (फिजिकल कॉलेज) परिसर की है। इस घटना ने न केवल परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि चिकित्सा के प्रति व्याप्त अंधविश्वास की कड़वी सच्चाई को भी उजागर किया है।

सोते समय सांप ने बनाया शिकार

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछोर तहसील के पुनावली गांव के रहने वाले रजनेश आदिवासी फिजिकल कॉलेज में अस्थायी चौकीदार के रूप में कार्यरत हैं। वे अपने परिवार के साथ कॉलेज के मुख्य गेट पर स्थित गार्ड रूम में रहते हैं। सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 4 बजे जब पूरा परिवार गहरी नींद में था, तभी एक जहरीला सांप कमरे में घुस आया और रजनेश की चार वर्षीय बेटी खुशी आदिवासी को डस लिया।

बच्ची के अचानक रोने की आवाज सुनकर परिजन और कॉलेज का अन्य स्टाफ तुरंत सतर्क हो गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बच्ची को आनन-फानन में इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। डॉक्टरों ने बच्ची को बचाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन जहर का असर इतना गहरा था कि मंगलवार सुबह उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

पोस्टमार्टम से इनकार कर झाड़-फूंक का सहारा

बच्ची की मौत के बाद अस्पताल में एक अजीब और चिंताजनक स्थिति पैदा हो गई। कानूनी प्रक्रिया के तहत शव का पोस्टमार्टम होना आवश्यक था, लेकिन शोक में डूबे परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। चिकित्सा विज्ञान पर भरोसा करने के बजाय, परिजन बच्ची के शव को लेकर किसी अज्ञात स्थान के लिए रवाना हो गए, जहां वे झाड़-फूंक के जरिए उसे जीवित करने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती पेश की है। पुलिस और कॉलेज प्रबंधन को भी इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि परिजन बच्ची को किस स्थान पर ले गए हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अभाव में लोग आज भी ऐसी घटनाओं में अंधविश्वास का रास्ता चुन रहे हैं, जो न केवल कानूनी रूप से गलत है बल्कि बेहद जोखिम भरा भी है।

जागरूकता की कमी और प्रशासनिक चिंता

शिवपुरी की यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों और अशिक्षित वर्ग में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता की कमी को दर्शाती है। सर्पदंश के मामलों में 'गोल्डन ऑवर' का विशेष महत्व होता है, जहां समय पर एंटी-वेनम इंजेक्शन ही जीवन बचा सकता है। हालांकि, झाड़-फूंक के चक्कर में कीमती समय बर्बाद हो जाता है, जिससे मरीज की स्थिति और बिगड़ जाती है।

वर्तमान में, कॉलेज प्रबंधन और स्थानीय पुलिस मामले की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है। इस दुखद घटना ने एक बार फिर समाज में व्याप्त अंधविश्वास के खिलाफ कड़े कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। प्रशासन अब इस बात पर विचार कर रहा है कि कैसे लोगों को ऐसी स्थितियों में वैज्ञानिक उपचार अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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