ग्वालियर: भंडारे से लौटते समय बच्चों ने खाया जहरीला फल, 10 की हालत गंभीर
बच्चों ने खेत के किनारे लगे रतनजोत के पौधे के फल को ड्राई फ्रूट समझकर खा लिया था। गंभीर हालत को देखते हुए 8 बच्चों को कमला राजा अस्पताल के पीआईसीयू (PICU) और 2 बच्चों को न्यू जेएएच के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

ड्राईफ्रूट समझकर खाया जहरीला फल
ग्वालियर जिले के मुरार ब्लॉक स्थित सिरसौद गांव में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां रतनजोत का फल खाने से 10 बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। ये बच्चे रविवार शाम को गांव में आयोजित भागवत कथा और भंडारे में शामिल होकर अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में खेत के किनारे लगे रतनजोत के पौधे को देखकर बच्चों ने उसके फलों को ड्राईफ्रूट समझ लिया और आपस में बांटकर खा लिया।
घर पहुंचने के कुछ ही समय बाद बच्चों को पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी और दस्त की समस्या होने लगी। बच्चों की बिगड़ती हालत देखकर परिजन घबरा गए और उन्हें तुरंत मुरार जिला अस्पताल ले गए। वहां से प्राथमिक जांच के बाद सभी बच्चों को जयारोग्य अस्पताल (JAH) समूह के कमला राजा अस्पताल (KRA) रेफर कर दिया गया।
अस्पताल में भर्ती बच्चों की स्थिति
फिलहाल सभी 10 बच्चों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। गंभीर स्थिति को देखते हुए 8 बच्चों को कमला राजा अस्पताल के पीआईसीयू (PICU) में भर्ती किया गया है, जिनमें पूजा, आरती, दीक्षा, प्रवीण, दिव्या, सुमित, गौरव और तनु शामिल हैं। वहीं, दो अन्य बच्चों, हरिओम और सेजल की स्थिति अधिक नाजुक होने के कारण उन्हें न्यू जेएएच के आईसीयू में रखा गया है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, कुछ और बच्चों को भी निगरानी में लाया गया है।
बच्चों की स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ. घनश्याम दास ने खुद अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने डॉक्टरों की टीम को उपचार के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। डॉ. दास ने स्पष्ट किया कि रतनजोत का फल अत्यधिक जहरीला होता है, जिसके सेवन से शरीर में टॉक्सिसिटी फैल जाती है और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
अस्पताल प्रबंधन पर परिजनों के सवाल
इस घटना के बाद परिजनों ने मुरार जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि जब वे बच्चों को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, तो वहां उन्हें प्राथमिक उपचार देने के बजाय सीधे रेफर कर दिया गया। उनका कहना है कि यदि बच्चों को वहां तत्काल प्राथमिक चिकित्सा मिल जाती, तो उनकी स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। हालांकि, जिला अस्पताल की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
चिकित्सकों ने इस घटना को एक चेतावनी के रूप में लेते हुए अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को अनजान पेड़-पौधों के फल या बीज खाने से सख्ती से रोकें। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर बच्चे खेल-खेल में ऐसे जहरीले पौधों के संपर्क में आ जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अज्ञात फल के सेवन के बाद यदि बच्चे को उल्टी या पेट दर्द की शिकायत हो, तो बिना समय गंवाए उसे तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र ले जाना चाहिए।
सतर्कता ही बचाव
फिलहाल सभी बच्चों का इलाज जारी है और डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन ने भी ग्रामीणों से अपने आसपास के वातावरण में लगे ऐसे जहरीले पौधों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी है। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि ग्रामीण इलाकों में बच्चों की सुरक्षा और उनके खान-पान की आदतों पर अभिभावकों की निगरानी कितनी आवश्यक है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!