ब्रेकिंग
ग्वालियर: मुरार जिला अस्पताल में 6 दिन से बंद है ऑपरेशन थिएटर का एसी, मरीजों की बढ़ी मुश्किलेंजयपुर में सवर्ण समाज का शक्ति प्रदर्शन: यूजीसी रोल बैंक समेत विभिन्न मांगों को लेकर कलक्ट्रेट तक रैलीनूंह जलाभिषेक यात्रा से पहले बिट्टू बजरंगी हाउस अरेस्ट, फरीदाबाद स्थित आवास पर भारी पुलिस बल तैनातवाराणसी: एयरपोर्ट पर नौकरी का झांसा देकर ठगों ने खुलवाए बैंक खाते, 4.55 लाख का हुआ संदिग्ध ट्रांजेक्शनपूर्वांचल विश्वविद्यालय में प्रवेश का अंतिम दौर: बीए एलएलबी की सीटें फुल, एलएलएम में अभी भी मौकाराजस्थान SI भर्ती 2021: री-एग्जाम में अब केवल 2.25 लाख अभ्यर्थी ही होंगे शामिलबालोतरा में साइबर ठगों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब: कमीशन के लालच में बैंक खाते और सिम बेचने वाले दो गिरफ्तारइंदौर के कैंसर अस्पताल में राहत: अब आधी कीमत पर होगी PET स्कैन जांच, लीनियर एक्सीलेटर के लिए करना होगा इंतजार
ग्वालियर: मुरार जिला अस्पताल में 6 दिन से बंद है ऑपरेशन थिएटर का एसी, मरीजों की बढ़ी मुश्किलेंजयपुर में सवर्ण समाज का शक्ति प्रदर्शन: यूजीसी रोल बैंक समेत विभिन्न मांगों को लेकर कलक्ट्रेट तक रैलीनूंह जलाभिषेक यात्रा से पहले बिट्टू बजरंगी हाउस अरेस्ट, फरीदाबाद स्थित आवास पर भारी पुलिस बल तैनातवाराणसी: एयरपोर्ट पर नौकरी का झांसा देकर ठगों ने खुलवाए बैंक खाते, 4.55 लाख का हुआ संदिग्ध ट्रांजेक्शनपूर्वांचल विश्वविद्यालय में प्रवेश का अंतिम दौर: बीए एलएलबी की सीटें फुल, एलएलएम में अभी भी मौकाराजस्थान SI भर्ती 2021: री-एग्जाम में अब केवल 2.25 लाख अभ्यर्थी ही होंगे शामिलबालोतरा में साइबर ठगों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब: कमीशन के लालच में बैंक खाते और सिम बेचने वाले दो गिरफ्तारइंदौर के कैंसर अस्पताल में राहत: अब आधी कीमत पर होगी PET स्कैन जांच, लीनियर एक्सीलेटर के लिए करना होगा इंतजार

राजस्थान: 346 महात्मा गांधी अंग्रेजी स्कूलों में फिर शुरू होगी हिंदी माध्यम की पढ़ाई, छात्रों की कमी बनी वजह

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

19 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 753
राजस्थान: 346 महात्मा गांधी अंग्रेजी स्कूलों में फिर शुरू होगी हिंदी माध्यम की पढ़ाई, छात्रों की कमी बनी वजह
click here

राजस्थान में सरकारी स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदलने की महत्वाकांक्षी योजना को बड़ा झटका लगा है। राज्य के 346 महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों में छात्रों की भारी कमी के चलते शिक्षा विभाग ने अब इन स्कूलों में दोबारा हिंदी माध्यम से पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया है। इन स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में तब्दील करने के बाद उम्मीद के मुताबिक छात्र नहीं मिल पाए, जिसके कारण कक्षाओं में सन्नाटा पसरा हुआ था।

छात्रों के अभाव में विफल हुआ प्रयोग

राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों को कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर विकसित करने के उद्देश्य से महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की शुरुआत की थी। हालांकि, जमीनी हकीकत यह रही कि बड़ी संख्या में स्कूलों में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या नगण्य रही। खाली क्लासरूम को देखते हुए विभाग ने अब अपनी रणनीति में बदलाव किया है। जिन स्कूलों में पर्याप्त नामांकन नहीं हो पाया, वहां अब हिंदी माध्यम के विकल्प को फिर से बहाल किया जा रहा है।

शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। विभाग यह समझने की कोशिश कर रहा है कि अंग्रेजी माध्यम में बदलने के बाद नामांकन में इतनी भारी गिरावट क्यों आई और इसके पीछे के वास्तविक कारण क्या हैं।

शिक्षा विभाग ने मांगे चार अहम जवाब

इस पूरी स्थिति की समीक्षा के लिए शिक्षा विभाग ने जिला स्तर के अधिकारियों को चार मुख्य बिंदुओं पर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। सबसे पहले, विभाग यह जानना चाहता है कि अंग्रेजी के साथ हिंदी माध्यम को दोबारा शुरू करने की मजबूरी क्या है और इसका उन बच्चों पर क्या मनोवैज्ञानिक असर पड़ेगा जो वर्तमान में अंग्रेजी माध्यम में पढ़ रहे हैं।

दूसरे बिंदु में, विभाग ने उन स्कूलों के डेटा की मांग की है जो अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित होने से पहले संचालित थे। इसमें यह देखा जाएगा कि अंग्रेजी माध्यम लागू होने के बाद कक्षावार नामांकन में कितनी कमी आई है। इसके अलावा, विभाग यह भी जांचेगा कि इन स्कूलों के आसपास कौन-कौन से हिंदी माध्यम के विद्यालय चल रहे हैं और उनकी दूरी कितनी है।

अंतिम बिंदु के तहत, यह पता लगाया जाएगा कि इन स्कूलों में वर्तमान में कौन-कौन से संकाय और विषय पढ़ाए जा रहे हैं और क्या वहां संसाधनों की कोई कमी है।

शिक्षा नीति पर उठ रहे सवाल

इस बदलाव के बाद शिक्षा जगत में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। जानकारों का मानना है कि बिना पर्याप्त तैयारी और आधारभूत ढांचे के स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदलना एक जल्दबाजी भरा फैसला साबित हुआ। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अंग्रेजी माध्यम के प्रति छात्रों का रुझान उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, जिसके कारण अब विभाग को वापस पुरानी व्यवस्था की ओर लौटना पड़ रहा है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हिंदी माध्यम की वापसी के बाद इन 346 स्कूलों में छात्रों की संख्या में कितना सुधार आता है। शिक्षा विभाग की यह कवायद सरकारी स्कूलों की साख बचाने और छात्रों को शिक्षा से जोड़ने की एक कोशिश मानी जा रही है।

SponsoredVertex Media Studios advertisement

टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

संबंधित खबरें