राजस्थान में जेन जी का बड़ा हिस्सा शिक्षा और रोजगार से दूर, 77 लाख से अधिक युवा 'नीट' श्रेणी में

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजस्थान में जेन जी की स्थिति चिंताजनक
राजस्थान के युवाओं के भविष्य को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। राज्य में 15 से 29 वर्ष की आयु वर्ग वाली 'जेन जी' पीढ़ी का एक बड़ा हिस्सा वर्तमान में न तो किसी शैक्षणिक संस्थान से जुड़ा है, न ही वे किसी रोजगार या कौशल प्रशिक्षण का हिस्सा हैं। सांख्यिकी विभाग के हालिया आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के लगभग 35.28 प्रतिशत युवा 'नीट' (NEET - Not in Education, Employment, and Training) श्रेणी में आते हैं। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से 10 प्रतिशत अधिक है, जो राज्य की युवा शक्ति के एक बड़े वर्ग के मुख्यधारा से कटे होने को दर्शाता है।
वर्ष 2026 के जनसंख्या अनुमानों के आधार पर, राजस्थान में 15 से 29 वर्ष के कुल 2.20 करोड़ युवाओं में से लगभग 77.61 लाख युवा पूरी तरह से खाली बैठे हैं। 1997 से 2012 के बीच जन्मी यह पीढ़ी डिजिटल युग में बड़ी हुई है, लेकिन शिक्षा और कौशल विकास के अभाव में इनका भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। सर्वे के अनुसार, यह समस्या किसी एक विशेष वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी सामाजिक समूहों में व्याप्त है।
सामाजिक और आयु वर्ग के आधार पर आंकड़े
सामाजिक आधार पर नीट युवाओं की स्थिति का विश्लेषण करें तो अनुसूचित जनजाति वर्ग में यह दर 37.42 प्रतिशत, अनुसूचित जाति में 35.05 प्रतिशत, ओबीसी में 33.61 प्रतिशत और अन्य वर्गों में 37.98 प्रतिशत दर्ज की गई है। सभी प्रमुख सामाजिक वर्गों में एक-तिहाई से अधिक युवा शिक्षा या रोजगार से बाहर हैं। इसके अलावा, उम्र बढ़ने के साथ यह समस्या और गंभीर होती जाती है। 15-24 वर्ष के आयु वर्ग में नीट दर 30.07 प्रतिशत है, जो 15-29 वर्ष के आयु वर्ग में बढ़कर 35.28 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।
डिजिटल साक्षरता के मामले में भी विरोधाभास देखने को मिलता है। प्रदेश में 15-29 वर्ष के लगभग 65.9 प्रतिशत युवा मोबाइल का उपयोग करना जानते हैं और इनमें से 83.9 प्रतिशत स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। बावजूद इसके, इनमें से केवल 31.3 प्रतिशत युवा ही डिजिटल रूप से साक्षर हैं। इसका अर्थ है कि तकनीक का उपयोग केवल मनोरंजन या सामान्य कार्यों तक सीमित है, न कि कौशल विकास या करियर निर्माण के लिए।
शिक्षा और प्रशिक्षण में भागीदारी की कमी
पिछले 12 महीनों के आंकड़ों पर गौर करें तो केवल 29.8 प्रतिशत युवाओं ने ही किसी प्रकार की औपचारिक या अनौपचारिक शिक्षा या प्रशिक्षण में भाग लिया है। 15-24 वर्ष के आयु वर्ग में यह भागीदारी 53.8 प्रतिशत रही, जबकि 15-29 वर्ष के आयु वर्ग में यह घटकर 39.6 प्रतिशत रह गई। यह गिरावट दर्शाती है कि जैसे-जैसे युवा बड़े होते हैं, वे शिक्षा और प्रशिक्षण के दायरे से बाहर होते जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नीट दर का उच्च होना केवल बेरोजगारी का संकेत नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई जटिल कारण हैं। इनमें रोजगार के सीमित अवसर, आर्थिक-सामाजिक परिस्थितियां, महिलाओं की श्रम बाजार में कम भागीदारी और शिक्षा प्रणाली व उद्योग की जरूरतों के बीच तालमेल की कमी प्रमुख हैं। केवल नौकरी के अवसर पैदा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं को बाजार की मांग के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण देना और उन्हें वापस शिक्षा से जोड़ना अनिवार्य है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
युवा सशक्तिकरण विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति को सुधारने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है। स्कूल और कॉलेज से बाहर हो चुके युवाओं को दोबारा मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाने होंगे। साथ ही, प्रशिक्षण के बाद रोजगार सुनिश्चित करने के लिए उद्योग जगत के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा। विशेष रूप से महिलाओं के बीच नीट दर अधिक होने के कारण, उन्हें कौशल विकास के लिए प्रोत्साहित करना राज्य सरकार और नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती है।
आने वाले समय में यदि इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य की एक बड़ी युवा आबादी का कौशल विकास के बिना रह जाना आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से चिंता का विषय बन सकता है। राज्य के सांख्यिकी विभाग की यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं के लिए एक चेतावनी है कि वे शिक्षा और रोजगार के बीच के इस अंतर को पाटने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाएं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
