अजमेर: नर्सिंग छात्रों से दोहरी फीस वसूली का आरोप, दस्तावेज रोकने की धमकी से मचा हड़कंप
अजमेर के सराधना में संचालित एक नर्सिंग स्कूल को लेकर छात्र-छात्राओं ने फर्जीवाड़े और दोहरी फीस वसूली के आरोप लगाए हैं। मंगलवार को नर्सिंग स्टूडेंट्स कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला कलेक्टर व एसपी को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

अजमेर जिले के सराधना स्थित एक नर्सिंग स्कूल के छात्र-छात्राओं ने संस्थान प्रबंधन पर गंभीर धोखाधड़ी और दोहरी फीस वसूली के आरोप लगाए हैं। मंगलवार को बड़ी संख्या में छात्र कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई। छात्रों का कहना है कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और प्रबंधन द्वारा उन पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला और छात्रों का आरोप
छात्रों के अनुसार, उन्होंने सराधना में संचालित नर्सिंग स्कूल में दो साल की फीस के तौर पर प्रतिवर्ष 60 हजार रुपये जमा कराए थे। बाद में प्रशासनिक कार्रवाई के चलते जब स्कूल सील कर दिया गया, तो उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए कायड़ स्थित दूसरे संस्थान में स्थानांतरित होना पड़ा। अब कायड़ स्थित संस्थान के संचालक द्वारा उनसे दूसरे वर्ष की फीस दोबारा मांगी जा रही है। छात्रों का आरोप है कि यदि वे दोबारा फीस नहीं भरते हैं, तो उनके मूल दस्तावेज (ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स) रोकने की धमकी दी जा रही है।
पीड़ित छात्रों ने बताया कि सराधना में जिस भवन में स्कूल चल रहा था, वह केवल तीन कमरों का एक किराए का मकान था। वहां पढ़ाई के दौरान उन्हें संस्थान की मान्यता और सरकारी अनुमति से जुड़ी जानकारी को लेकर अंधेरे में रखा गया। बाद में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) अजमेर ने अनियमितताओं के चलते उस परिसर को सील कर दिया था।
संचालकों पर धोखाधड़ी का आरोप
छात्रों ने आरोप लगाया कि सराधना स्थित संस्थान के संचालकों महेंद्र सिंह, मोहन राम खोजा और शशिपाल कुमावत ने उनसे फीस ली थी, लेकिन स्कूल सील होने के बाद जब उन्होंने अपनी राशि वापस मांगी, तो संचालकों ने स्पष्ट मना कर दिया। इसके बाद से ही इन लोगों के मोबाइल फोन बंद आ रहे हैं। छात्रों ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक उन्हें न तो फीस वापस मिली है और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई है।
वहीं, कायड़ स्थित संस्थान के संचालक हेमराज चंडालिया पर भी छात्रों ने दबाव बनाने का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि वे पहले ही सराधना में पूरी फीस जमा कर चुके हैं, ऐसे में दोबारा इतनी बड़ी राशि का भुगतान करना उनके लिए आर्थिक रूप से असंभव है। दस्तावेज रोके जाने की धमकी से छात्र अपने करियर को लेकर चिंतित हैं।
प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग
कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपते हुए छात्रों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उन्होंने सराधना में अवैध तरीके से संस्थान संचालित करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप कर उनके मूल दस्तावेज सुरक्षित दिलवाने और पूर्व में जमा कराई गई फीस वापस दिलाने का आग्रह किया है।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने मई 2024 में संस्थान का अधिकृत पता बदलकर कायड़ स्थित आदित्य भवन कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद छात्रों को सराधना में ही पढ़ाया जाता रहा। इस विसंगति ने संस्थान की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, छात्र प्रशासन की ओर से उचित कार्रवाई के आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!