जयपुर सेंट्रल जेल में सुरक्षा में बड़ी चूक: चार बंदियों के पास से बरामद हुए मोबाइल फोन
जयपुर के केंद्रीय कारागृह में जेल प्रशासन की ओर से चलाए गए सघन तलाशी अभियान के दौरान चार विचाराधीन बंदियों के कब्जे से मोबाइल फोन बरामद किए गए। मामले में लालकोठी थाना पुलिस ने प्रिजन एक्ट की धारा 42 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

सुरक्षा घेरे में सेंध: जेल के अंदर मोबाइल का इस्तेमाल
जयपुर की सेंट्रल जेल में सुरक्षा व्यवस्था पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब एक औचक तलाशी अभियान के दौरान चार विचाराधीन बंदियों के पास से मोबाइल फोन बरामद किए गए। जेल प्रशासन द्वारा की गई इस कार्रवाई में प्रतिबंधित वस्तुओं के मिलने से हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए लालकोठी थाना पुलिस ने तत्काल प्रभाव से मुकदमा दर्ज कर लिया है और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जेल प्रहरी अनिल कुमार द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रिजन एक्ट की धारा 42 के तहत मामला पंजीबद्ध किया है। सब इंस्पेक्टर श्याम सुंदर ने बताया कि पुलिस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि आखिर जेल की कड़ी सुरक्षा को भेदकर ये मोबाइल फोन बंदियों तक कैसे पहुंचे और इनका उपयोग किन गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
तलाशी अभियान में हुआ खुलासा
यह घटना 22 अगस्त की है, जब दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच जेल परिसर में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा था। जेल प्रशासन ने वार्ड नंबर 4 और 7 की विभिन्न बैरकों की जांच की, जिसमें चार बंदियों के पास से मोबाइल फोन बरामद हुए। पकड़े गए बंदियों में जुबैर, नमो नमो उर्फ नईमुद्दीन, योगेंद्र उर्फ योगराज सिंह और विकास भाकल शामिल हैं।
तलाशी के दौरान वार्ड 7 की बैरक नंबर 1 में बंद जुबैर के पास से गुलाबी रंग का एक मोबाइल फोन मिला। वहीं, वार्ड 4 की बैरक नंबर 3 की तलाशी में नमो नमो उर्फ नईमुद्दीन के पास से सिल्वर रंग का और योगेंद्र उर्फ योगराज सिंह के पास से गोल्डन रंग का मोबाइल फोन बरामद हुआ। इसके अतिरिक्त, वार्ड 7 की बैरक नंबर 5 में बंद विकास भाकल के कब्जे से भी एक सिल्वर रंग का मोबाइल फोन जब्त किया गया।
पुलिस की जांच का दायरा
पुलिस अब इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि जेल के भीतर प्रतिबंधित संचार उपकरण पहुंचाने के पीछे किन लोगों का हाथ है। क्या इसमें जेल के भीतर से ही कोई मिलीभगत है या बाहर से किसी ने इन्हें अंदर तक पहुंचाया, इन सभी पहलुओं पर पुलिस बारीकी से काम कर रही है। मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और मैसेज हिस्ट्री को भी खंगाला जा सकता है ताकि किसी भी आपराधिक नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
जेल प्रशासन ने इस घटना के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने के संकेत दिए हैं। सेंट्रल जेल जैसे संवेदनशील स्थान पर मोबाइल का मिलना सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी खामी को दर्शाता है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आगे की कार्रवाई
फिलहाल, चारों बंदियों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि वे इन मोबाइल फोन का उपयोग कब से कर रहे थे और किन लोगों के संपर्क में थे। जेल प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तलाशी अभियानों को और अधिक सख्त और नियमित बनाने का निर्णय लिया है। इस मामले में पुलिस की आगामी कार्रवाई जेल के भीतर के नेटवर्क को तोड़ने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!