राजस्थान के 8 जिलों में डेंगू-मलेरिया का बढ़ा खतरा, स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किया अलर्ट
मंत्रालय की ओर से जारी इस सूची में राजस्थान के 8 जिलों को हाईरिस्क एरिया में शामिल किया है। इसमें राजधानी जयपुर के अलावा कोटा, उदयपुर भी शामिल है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजस्थान के 8 जिलों में मौसमी बीमारियों का हाई रिस्क
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश भर में मौसमी बीमारियों के प्रसार को लेकर एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। इस सूची में राजस्थान के 8 जिलों को 'हाई रिस्क' श्रेणी में रखा गया है। मंत्रालय ने पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद यह निर्णय लिया है, जहां डेंगू और मलेरिया के मामले 500 से अधिक दर्ज किए गए थे। इन जिलों में राजधानी जयपुर के साथ-साथ कोटा और उदयपुर जैसे प्रमुख शहर भी शामिल हैं।
इस वर्ष कमजोर मानसून की संभावनाओं के बीच नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव को मौसमी बीमारियों के पनपने के लिए अनुकूल माना जा रहा है। मंत्रालय ने राज्यों को आगाह किया है कि आने वाले समय में डेंगू और मलेरिया के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिसके लिए पहले से ही पुख्ता इंतजाम करने की आवश्यकता है।
मच्छरों की रोकथाम के लिए विशेष अभियान
स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाई रिस्क वाले जिलों में मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए 'ड्राइंग-डे' गतिविधियों को अनिवार्य रूप से चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत स्थानीय प्रशासन को उन क्षेत्रों में एंटी-लार्वा गतिविधियां तेज करने को कहा गया है जहां पानी जमा होने और मच्छरों के पनपने की संभावना सबसे अधिक होती है। आम जनता को भी इन बीमारियों के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 23 जिलों को हाई रिस्क में रखा गया है। इसके अलावा महाराष्ट्र में 15, बिहार और पंजाब में 9-9, हरियाणा में 8, दिल्ली के 7 क्षेत्रों, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड में 4-4 तथा छत्तीसगढ़ में 1 जिले को विशेष निगरानी सूची में शामिल किया गया है।
तैयारियों के लिए रेपिड रिस्पांस टीम का गठन
बीमारियों के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए मंत्रालय ने सभी राज्यों को त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली 'रेपिड रिस्पांस टीम' (RRT) गठित करने का निर्देश दिया है। ये टीमें न केवल मामलों की ट्रेसिंग करेंगी, बल्कि मरीजों के प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी सुनिश्चित करेंगी। इसके साथ ही अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाइयों, ब्लड और ब्लड कंपोनेंट्स का स्टॉक रखने के लिए भी कहा गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रभावित क्षेत्रों में नियमित अंतराल पर मॉनिटरिंग करें। किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि समय रहते मरीजों को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
आगे की रणनीति और सतर्कता
आगामी दिनों में मौसमी स्थितियों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकारों को निर्देशित किया गया है कि वे स्थानीय निकायों के साथ समन्वय स्थापित कर साफ-सफाई और जलभराव की समस्याओं का त्वरित समाधान करें। आमजन से भी अपील की गई है कि वे अपने आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छरों से बचाव के लिए सावधानी बरतें।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
