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कानपुर से ब्रिटेन तक टैक्स-फ्री व्यापार की शुरुआत: पहले ही दिन 1.6 करोड़ का निर्यात

कानपुर के गल्ला और सब्जी व्यापारियों के बाद अब यहाँ के चमड़ा, कपड़ा और इंजीनियरिंग कारोबारियों के लिए भी एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। बुधवार, 15 जुलाई 2026 से भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच ऐतिहासिक व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) और सामाजिक सुरक्षा समझौता पूरी तरह लागू हो गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

15 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 892
कानपुर से ब्रिटेन तक टैक्स-फ्री व्यापार की शुरुआत: पहले ही दिन 1.6 करोड़ का निर्यात
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कानपुर के औद्योगिक क्षेत्र के लिए 15 जुलाई 2026 की तारीख एक ऐतिहासिक बदलाव लेकर आई है। भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) और सामाजिक सुरक्षा समझौता आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इस समझौते के प्रभावी होते ही कानपुर के पनकी स्थित लॉजिस्टिक्स पार्क (KLPL) से अंतरराष्ट्रीय व्यापार का एक नया अध्याय शुरू हुआ है।

पहले ही दिन करोड़ों का निर्यात

समझौते के लागू होने के पहले ही दिन कानपुर से ब्रिटेन के लिए निर्यात की पहली खेप रवाना की गई। मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह के माध्यम से भेजे गए इस शिपमेंट में लेदर बेल्ट, जूते और रेडीमेड कपड़ों सहित करीब 2 लाख डॉलर यानी लगभग 1.6 करोड़ रुपये का सामान शामिल है। यह कदम कानपुर के निर्यातकों के लिए वैश्विक बाजार में अपनी पैठ मजबूत करने का एक बड़ा अवसर है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट्स ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) के अनुसार, यह समझौता स्थानीय कारोबारियों के लिए वरदान साबित होगा। अब तक भारतीय उत्पादों पर ब्रिटेन में 4% से 16% तक का आयात शुल्क देना पड़ता था, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती थी। अब 99% सामान पर टैक्स का बोझ खत्म होने से निर्यातकों का मुनाफा बढ़ेगा और विदेशी बाजार में भारतीय उत्पादों की मांग में तेजी आएगी।

पेशेवरों और सेवा क्षेत्र को मिलेगा लाभ

इस व्यापारिक समझौते का लाभ केवल वस्तुओं के निर्यात तक सीमित नहीं है। ब्रिटेन जाने वाले भारतीय तकनीकी और कुशल पेशेवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा अंशदान में बड़ी राहत दी गई है। नए नियमों के तहत, अस्थायी नियुक्ति पर यूके जाने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स को अब 5 साल तक सामाजिक सुरक्षा टैक्स से छूट मिलेगी। इससे वहां काम करने वाले युवाओं की बचत में सीधा इजाफा होगा।

इसके अलावा, 137 सेवा उप-क्षेत्रों (सर्विस सब-सेक्टर्स) के लिए रास्ते खुलने से भारतीय सेवा क्षेत्र को भी यूके के बाजार में बड़ी हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि विदेशी निवेश आकर्षित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे।

विकसित भारत के लक्ष्य की ओर कदम

आईसीडी पनकी में आयोजित एक विशेष समारोह में इस व्यापारिक शुरुआत को हरी झंडी दिखाई गई। इस मौके पर स्थानीय विधायक नीलिमा कटियार के साथ कस्टम्स, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) और एफआईईओ के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने इसे उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से कानपुर की औद्योगिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने वाला कदम बताया।

यह आर्थिक साझेदारी भारत के 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। कानपुर के चमड़ा, कपड़ा और इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए यह समझौता भविष्य में व्यापारिक विस्तार की नई संभावनाएं खोल रहा है, जिससे आने वाले समय में निर्यात के आंकड़ों में और अधिक उछाल आने की प्रबल संभावना है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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