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जैसलमेर में आंधी का कहर: 8 बिजली टॉवर गिरे, शहर में पानी की किल्लत

जैसलमेर में पिछले दिनों आए भीषण आंधी-तूफान ने बिजली और पानी की आपूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। जेसूराणा और भैरवा गांव के पास 132 केवी (KV) के आठ बड़े विद्युत टॉवर धराशायी होने से मोहनगढ़ पीएचईडी नहरी हैडवर्क्स को होने वाली बिजली सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

7 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
जैसलमेर में आंधी का कहर: 8 बिजली टॉवर गिरे, शहर में पानी की किल्लत
मूल स्रोत

जैसलमेर में भीषण आंधी से बिजली तंत्र ध्वस्त

राजस्थान के जैसलमेर जिले में हाल ही में आए तेज आंधी और चक्रवाती तूफान ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण जिले की विद्युत व्यवस्था चरमरा गई है, जिसका सीधा असर पेयजल आपूर्ति पर पड़ा है। जेसूराणा और भैरवा गांव के पास 132 केवी की मुख्य विद्युत लाइन के आठ विशालकाय टॉवर धराशायी हो गए हैं, जिससे बिजली आपूर्ति ठप हो गई है।

विद्युत टॉवरों के गिरने से मोहनगढ़ स्थित पीएचईडी (PHED) नहरी हैडवर्क्स को होने वाली बिजली सप्लाई पूरी तरह से बाधित हो गई है। जलदाय विभाग के सहायक अभियंता देवीलाल भील ने बताया कि इस तकनीकी खराबी के कारण शहर की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। हैडवर्क्स के पंप बंद होने से पानी की लिफ्टिंग रुक गई है, जिससे शहर के जलाशयों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है।

दो दिनों में दो बार हुआ नुकसान

आपदा की शुरुआत 4 जुलाई की रात को हुई थी, जब तेज आंधी के कारण जेसूराणा गांव के समीप 132 केवी लाइन के सात टॉवर ताश के पत्तों की तरह ढह गए थे। इस घटना से स्थानीय ग्रिड व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। प्रशासन अभी इस नुकसान की भरपाई की योजना बना ही रहा था कि सोमवार दोपहर को मौसम ने फिर करवट ली और दूसरी आंधी ने भैरवा गांव के पास एक और 132 केवी जीएसएस टॉवर को क्षतिग्रस्त कर दिया।

लगातार दो दिनों तक हुई इन घटनाओं ने डिस्कॉम और जलदाय विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अधिकारियों के अनुसार, टॉवरों के गिरने से न केवल बिजली तंत्र को भारी नुकसान हुआ है, बल्कि मरम्मत कार्य में भी काफी समय लगने की संभावना है। इस स्थिति ने पूरे जिले में बिजली और पानी के संकट को जन्म दे दिया है।

शहर में 24 घंटे की देरी से मिलेगा पानी

पेयजल आपूर्ति बाधित होने के कारण जैसलमेर शहर के निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सहायक अभियंता देवीलाल भील ने स्पष्ट किया है कि बिजली आपूर्ति बहाल होने में समय लगने के कारण शहर में पानी की सप्लाई में कम से कम 24 घंटे की देरी होगी। उन्होंने हजारों उपभोक्ताओं से धैर्य बनाए रखने की अपील की है।

विभाग ने नागरिकों से पानी का उपयोग बेहद सीमित और किफायत के साथ करने का आग्रह किया है। वर्तमान में जो भी जल भंडार उपलब्ध है, उसे सावधानीपूर्वक खर्च करने की सलाह दी गई है ताकि संकट के इस दौर में लोगों को अधिक असुविधा न हो।

युद्धस्तर पर बहाली का कार्य जारी

बिजली कंपनी और जलदाय विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर दी गई हैं। गिरे हुए भारी-भरकम टॉवरों को हटाने और वैकल्पिक माध्यमों से बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। भीषण गर्मी और रेतीली हवाओं के बीच काम करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, लेकिन विभाग का दावा है कि जल्द ही स्थिति को सामान्य कर लिया जाएगा।

प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। मरम्मत कार्य की गति को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक से दो दिनों में बिजली और पानी की व्यवस्था सुचारू हो जाएगी। फिलहाल, प्रभावित इलाकों में वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जा रहा है ताकि आमजन को राहत मिल सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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