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जयपुर: डॉक्टरों ने पेट से निकाला 48 सेमी का विशाल कैंसर ट्यूमर, 8 घंटे की सर्जरी में मिली बड़ी सफलता

जयपुर के सीनियर ऑन्कोसर्जन डॉ. आनंद मोहन और उनकी टीम ने एक अत्यंत जटिल एवं दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। डॉक्टरों ने मरीज के पेट से 48 सेंटीमीटर (सेमी) आकार के सॉफ्ट टिश्यू ट्यूमर (कैंसर) को पूरी तरह से बाहर निकाल दिया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

18 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 1.1K
जयपुर: डॉक्टरों ने पेट से निकाला 48 सेमी का विशाल कैंसर ट्यूमर, 8 घंटे की सर्जरी में मिली बड़ी सफलता
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जयपुर के चिकित्सा जगत में एक दुर्लभ और जटिल सर्जरी का मामला सामने आया है, जहां डॉक्टरों की एक टीम ने मरीज के पेट से 48 सेंटीमीटर का विशाल कैंसर ट्यूमर सफलतापूर्वक बाहर निकाला है। यह ऑपरेशन राजस्थान में अपनी तरह के सबसे बड़े और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनों में गिना जा रहा है। मरीज पिछले काफी समय से पेट में दर्द और गांठ की समस्या से जूझ रहा था।

किडनी के पीछे छिपा था ट्यूमर

मरीज जब अस्पताल पहुंचा, तो प्रारंभिक जांच में पेट में एक बड़ी गांठ का पता चला। गहन परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने पाया कि यह ट्यूमर किडनी के पीछे स्थित है और इसने पेट के कई महत्वपूर्ण अंगों व मुख्य रक्त वाहिकाओं पर दबाव बना रखा है। इसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में 'रेट्रोपेरिटोनियल सार्कोमा' कहा जाता है। राहत की बात यह रही कि कैंसर शरीर के अन्य अंगों तक नहीं फैला था, जिससे डॉक्टरों को सर्जरी के जरिए इसे पूरी तरह हटाने का अवसर मिला।

सर्जरी के दौरान डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ट्यूमर के विशाल आकार और उसकी स्थिति को लेकर थी। ट्यूमर ने शरीर की मुख्य धमनियों को बुरी तरह जकड़ रखा था, जिससे ऑपरेशन के दौरान किसी भी प्रकार की चूक मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी। मेडिकल टीम ने पूरी सावधानी बरतते हुए इस जोखिम भरे ऑपरेशन को अंजाम देने की योजना बनाई।

8 घंटे तक चली जटिल प्रक्रिया

लगभग आठ घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी में डॉक्टरों ने ट्यूमर को 'एन-ब्लॉक' यानी एक साथ बाहर निकालने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया के दौरान ट्यूमर के साथ-साथ मरीज की दाईं किडनी और बड़ी आंत के एक प्रभावित हिस्से को भी हटाना पड़ा। ट्यूमर निकालने के बाद आंतों को दोबारा जोड़ने और पेट की आंतरिक संरचनाओं को पुनर्गठित करने का कार्य अत्यंत सावधानी से किया गया।

ऑपरेशन के बाद मरीज को डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा गया। विशेषज्ञों की टीम ने निरंतर मॉनिटरिंग की, जिसके परिणामस्वरूप मरीज की रिकवरी काफी तेजी से हुई। सर्जरी के आठवें दिन मरीज को पूरी तरह स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में मरीज सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा है और उसकी स्थिति स्थिर बनी हुई है।

रेट्रोपेरिटोनियल सार्कोमा की गंभीरता

चिकित्सकों के अनुसार, रेट्रोपेरिटोनियल सार्कोमा एक दुर्लभ प्रकार का सॉफ्ट टिश्यू कैंसर है जो पेट के गहरे हिस्सों में विकसित होता है। चूंकि यह शुरुआती चरणों में दिखाई नहीं देता, इसलिए यह धीरे-धीरे बढ़कर अंगों को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे मामलों में केवल सर्जरी ही एकमात्र प्रभावी उपचार माना जाता है, लेकिन इसके लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञता और आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है।

इस सफल सर्जरी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि समय पर सही निदान और कुशल डॉक्टरों की टीम के माध्यम से गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज संभव है। मरीज ने इस नई जिंदगी के लिए अस्पताल की पूरी मेडिकल टीम का आभार व्यक्त किया है। अस्पताल प्रशासन ने भी इसे अपनी टीम की एक बड़ी उपलब्धि बताया है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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