हरियाणा में ड्रोन और एआई से होगी निगरानी, अवैध निर्माण और खनन पर कसेगा शिकंजा
Haryana surveillance using AI high resolution drone mapping for illegal construction and mining. हरियाणा में अब ड्रोन तकनीक सुशासन का अहम हिस्सा बनेगी। अवैध निर्माण, अतिक्रमण, अवैध खनन, प्रदूषण और पुराने कचरा स्थलों की निगरानी एआई आधारित सिस्टम और हाई रेजोल्यूशन ड्रोन इमेजरी से की जाएगी।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

हरियाणा सरकार ने राज्य में सुशासन और बेहतर निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बड़े पैमाने पर उपयोग करने का निर्णय लिया है। इस नई पहल के तहत अवैध निर्माण, अतिक्रमण, अवैध खनन और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर ड्रोन के जरिए नजर रखी जाएगी। हाई-रेजोल्यूशन मैपिंग और एआई आधारित सिस्टम की मदद से सरकारी विभागों को सटीक डिजिटल डेटा उपलब्ध होगा, जिससे जमीनी स्तर पर हो रही गड़बड़ियों को तुरंत पकड़ा जा सकेगा।
पांच शहरों में डिजिटल मैपिंग का काम पूरा
ड्रोन इमेजिंग एंड इंफॉर्मेशन सर्विसेज ऑफ हरियाणा (दृश्या) की हालिया समीक्षा बैठक में परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने अधिकारियों को सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। वर्तमान में फरीदाबाद, हिसार, करनाल, पानीपत और यमुनानगर में लगभग 800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की डिजिटल मैपिंग पूरी कर ली गई है। यह डेटा शहरी नियोजन और प्रवर्तन कार्यों में एक मजबूत आधार के रूप में काम करेगा।
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत 'चेंज डिटेक्शन एप्लीकेशन' है। यह तकनीक ड्रोन से ली गई तस्वीरों का विश्लेषण कर स्वतः ही यह पहचान लेगी कि किसी क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण या अतिक्रमण हुआ है या नहीं। इससे मैन्युअल सर्वे पर निर्भरता कम होगी और सरकारी तंत्र को वास्तविक समय में सूचना प्राप्त हो सकेगी।
बुनियादी ढांचे और पर्यावरण की सुरक्षा
गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों में बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए भी ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहां सड़क नेटवर्क, फुटपाथ और सेंट्रल वर्ज का डिजिटलीकरण किया गया है। इसके अलावा, करीब 60 हजार मैनहोल और गली ट्रैप की सेंटीमीटर स्तर की सटीकता के साथ जियो-रेफरेंसिंग की जा रही है, जिससे आपातकालीन स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देना आसान होगा।
पर्यावरण संरक्षण के मोर्चे पर भी ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिए प्रमुख नालों का थर्मल इमेजिंग और वीडियोग्राफी के जरिए सर्वे किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य अवैध सीवेज डिस्चार्ज पॉइंट्स की पहचान करना और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करना है।
खनन और कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान
खानक स्टोन माइंस में ड्रोन के जरिए मासिक निगरानी की जा रही है। अब तक सर्वे के आठ चरण पूरे हो चुके हैं और छह चरणों की वॉल्यूमेट्रिक असेसमेंट रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। इससे खनन की वास्तविक मात्रा का वैज्ञानिक आकलन करना संभव हो गया है, जिससे अवैध खनन पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत राज्य की 16 नगर परिषदों में पुराने कचरे (लिगेसी वेस्ट) के ढेरों का ड्रोन से वॉल्यूमेट्रिक आकलन किया गया है। इस सर्वे की रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई है, जिससे कचरे के वैज्ञानिक उपचार और लैंडफिल साइटों के प्रबंधन में मदद मिलेगी।
यह तकनीक न केवल सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाएगी, बल्कि संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में भी सहायक सिद्ध होगी। आने वाले समय में इस तकनीक का विस्तार अन्य क्षेत्रों में भी किए जाने की योजना है ताकि राज्य के हर हिस्से में निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
