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ग्वालियर: विशेष लोक अदालत में चेक बाउंस के 100 मामले सुलझे, 75 लाख से अधिक का हुआ समझौता

Lok Adalat dispute settlement news 2026. Check bounce cases resolved, huge awards passed. विशेष लोक अदालत में समझौते से सुलझे विवाद,75 लाख से ज्यादा का अवार्ड पारित,पक्षकारों को मिली बड़ी राहत. एक दिन में 100 चेक बाउंस केस खत्म.

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

19 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 919
ग्वालियर: विशेष लोक अदालत में चेक बाउंस के 100 मामले सुलझे, 75 लाख से अधिक का हुआ समझौता
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ग्वालियर में शनिवार का दिन चेक बाउंस के मामलों में उलझे लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आया। जिला एवं सत्र न्यायालय में आयोजित विशेष लोक अदालत के दौरान एनआई एक्ट (परक्राम्य लिखत अधिनियम) की धारा 138 से संबंधित 100 लंबित मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया। इस पहल से न केवल अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ कम हुआ, बल्कि वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे पक्षकारों को भी बड़ी राहत मिली है।

75 लाख रुपये से अधिक का हुआ समझौता

विशेष लोक अदालत में सुलझाए गए इन 100 मामलों में दोनों पक्षों ने आपसी समझदारी दिखाते हुए विवाद को समाप्त करने का निर्णय लिया। इन प्रकरणों में कुल 75 लाख 7 हजार रुपये से अधिक का अवार्ड पारित किया गया। लोक अदालत की यह प्रक्रिया पूरी तरह से सौहार्दपूर्ण रही, जिससे दोनों पक्षों को लंबी कानूनी कार्यवाही और अदालती चक्करों से मुक्ति मिल गई।

मुख्य मामलों के अलावा, अदालत में प्री-लिटिगेशन स्तर के 29 मामलों का भी समाधान किया गया। इन मामलों में 9 लाख 50 हजार रुपये का अवार्ड पारित हुआ। प्री-लिटिगेशन मामलों का निपटारा होने से यह स्पष्ट है कि लोग अब अदालती मुकदमेबाजी से बचने के लिए सुलह-समझौते को प्राथमिकता दे रहे हैं।

जिले भर में सक्रिय रहीं 9 विशेष खंडपीठें

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित इस विशेष लोक अदालत का दायरा केवल ग्वालियर मुख्यालय तक सीमित नहीं था। डबरा और भितरवार के सिविल न्यायालयों में भी विशेष लोक अदालतें आयोजित की गईं। प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष ललित किशोर के मार्गदर्शन में इन सभी अदालतों ने प्रभावी ढंग से काम किया।

जिला न्यायालय में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ जिला न्यायाधीश प्रदीप दुबे द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पुष्पेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे। मामलों के त्वरित निपटारे के लिए कुल 9 विशेष खंडपीठों का गठन किया गया था, ताकि किसी भी पक्षकार को अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े।

कानूनी बोझ कम करने की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि लोक अदालत के माध्यम से चेक बाउंस जैसे मामलों का निपटारा एक सकारात्मक बदलाव है। धारा 138 के तहत दर्ज होने वाले मामले अक्सर वर्षों तक चलते हैं, जिससे दोनों पक्षों का समय और धन दोनों बर्बाद होता है। लोक अदालत के माध्यम से इन मामलों को सुलझाने से न केवल अदालतों का कार्यभार कम होता है, बल्कि समाज में आपसी भाईचारा भी बढ़ता है।

इस आयोजन की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि पक्षकार चाहें, तो जटिल से जटिल कानूनी विवादों को भी आपसी बातचीत से हल किया जा सकता है। आने वाले समय में भी इस तरह की लोक अदालतों का आयोजन जारी रहेगा, ताकि आम जनता को सुलभ और सस्ता न्याय मिल सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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