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गोपालगंज के हथुआ में लगेगा लिथियम बैटरी प्लांट, 30 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

12 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
गोपालगंज के हथुआ में लगेगा लिथियम बैटरी प्लांट, 30 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
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बिहार के औद्योगिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। गोपालगंज जिले के हथुआ में लिथियम-आयन बैटरी निर्माण का एक अत्याधुनिक कारखाना स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना से न केवल राज्य में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, बल्कि हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।

87.55 करोड़ का निवेश और 2027 से उत्पादन

उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार के अनुसार, यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट हथुआ के फेज-3 में 5.06 एकड़ भूमि पर आकार लेगा। इस फैक्ट्री के निर्माण के लिए कुल 87.55 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। परियोजना का लक्ष्य वर्ष 2027 तक व्यावसायिक उत्पादन शुरू करना है। इस संयंत्र की स्थापना के साथ ही बिहार बैटरी निर्माण के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरने की तैयारी कर रहा है।

रोजगार की दृष्टि से यह प्लांट बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। फैक्ट्री के भीतर सीधे तौर पर 400 से अधिक कुशल कर्मियों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा, आपूर्ति श्रृंखला और सहायक उद्योगों के माध्यम से लगभग 30 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की उम्मीद है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सकारात्मक कदम होगा।

लिथियम-आयन तकनीक के लाभ और क्षमता

लिथियम-आयन बैटरी पारंपरिक लेड-एसिड बैटरी की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी मानी जाती है। यह तकनीक 10 गुना अधिक ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम है और इसकी चार्जिंग गति भी काफी तेज है। जहां सामान्य बैटरी का जीवनकाल लगभग दो वर्ष का होता है, वहीं लिथियम-आयन बैटरी पांच वर्षों तक बेहतर बैकअप और प्रदर्शन देती है। इस प्लांट के शुरू होने से मोबाइल, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी की उपलब्धता स्थानीय स्तर पर आसान हो जाएगी।

इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 5,000 बैटरी तैयार करने की होगी। इस बड़े पैमाने पर उत्पादन से न केवल बिहार की मांग पूरी होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे पड़ोसी राज्यों में भी इनकी आपूर्ति की जाएगी। इसके अलावा, नेपाल तक इन बैटरियों के निर्यात की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

हथुआ में इस प्लांट के लगने से न केवल तकनीकी विकास होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर कीमतों में भी कमी आने की संभावना है। जब बैटरियों का निर्माण राज्य में ही होगा, तो परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत कम होगी, जिसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा। यह पहल बिहार को ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

इस परियोजना के क्रियान्वयन से गोपालगंज क्षेत्र में औद्योगिक माहौल बनेगा, जिससे अन्य निवेशकों को भी आकर्षित किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इस तरह के निवेश से राज्य के युवाओं को पलायन करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें अपने ही गृह क्षेत्र में बेहतर करियर के अवसर प्राप्त होंगे।

आने वाले समय में, जैसे-जैसे निर्माण कार्य आगे बढ़ेगा, बुनियादी ढांचे में भी सुधार की उम्मीद है। हथुआ का यह लिथियम-आयन बैटरी प्लांट बिहार के औद्योगिक भविष्य के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, जो राज्य को नई ऊर्जा और आर्थिक मजबूती प्रदान करेगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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