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फरीदाबाद: 44 वर्षीय महिला के पेट से निकला 7 किलो का विशाल ट्यूमर, जटिल ऑपरेशन के बाद मिली नई जिंदगी

Faridabad woman survives complex surgery removing seven kilogram tumor. फरीदाबाद में पेट का लगातार बढ़ता आकार और कब्ज जैसी समस्या को सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज करना 44 वर्षीय महिला को भारी पड़ गया। जांच में पता चला कि उनके गर्भाशय और अंडाशय के बीच 41 सेंटीमीटर का करीब सात किलोग्राम वजनी विशाल ट्यूमर विकसित हो गया था।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

19 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1.4K
फरीदाबाद: 44 वर्षीय महिला के पेट से निकला 7 किलो का विशाल ट्यूमर, जटिल ऑपरेशन के बाद मिली नई जिंदगी
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फरीदाबाद में एक 44 वर्षीय महिला को उस समय बड़ी राहत मिली जब डॉक्टरों की एक टीम ने उनके पेट से सात किलोग्राम वजनी विशाल ट्यूमर को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया। महिला लंबे समय से पेट के बढ़ते आकार और कब्ज जैसी समस्याओं से जूझ रही थी, जिसे उन्होंने शुरुआत में सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया था। हालांकि, जब स्थिति असहनीय हो गई, तो जांच में सामने आया कि उनके गर्भाशय और अंडाशय के बीच 41 सेंटीमीटर का एक बेहद खतरनाक ट्यूमर विकसित हो चुका है।

अंगों पर बना रहा था गंभीर दबाव

मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के विशेषज्ञों के अनुसार, जब मरीज अस्पताल पहुंचीं, तब तक उनका पेट सामान्य आकार से चार गुना तक फूल चुका था। इस ट्यूमर का आकार इतना बड़ा था कि यह महिला की आंतों और मूत्रवाहिनी (यूरेटर) पर लगातार दबाव बना रहा था। यदि समय रहते सर्जरी नहीं की जाती, तो यह स्थिति महिला के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी। डॉक्टरों ने तुरंत इस जटिल मामले को गंभीरता से लेते हुए ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी।

इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को अंजाम देने के लिए प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की निदेशक डॉ. निशा कपूर के नेतृत्व में एक मल्टीडिसिप्लिनरी टीम का गठन किया गया। चार घंटे तक चले इस ऑपरेशन में डॉ. सचिन मित्तल, डॉ. बीरबल कुमार, डॉ. कनिका और डॉ. अपर्णा शामिल रहे। डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ट्यूमर को बिना फटे बाहर निकालना था ताकि पेट के अन्य अंगों को नुकसान न पहुंचे और रक्तस्राव को नियंत्रित रखा जा सके।

जटिल ऑपरेशन और सावधानीपूर्वक प्रक्रिया

सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि ट्यूमर पूरे पेट की गुहा में फैल चुका था और कई महत्वपूर्ण अंगों से मजबूती से चिपक गया था। डॉ. बीरबल कुमार ने बताया कि अंगों को सुरक्षित बचाते हुए ट्यूमर को अलग करना एक अत्यंत कठिन कार्य था। फ्रोजन सेक्शन जांच में ट्यूमर की बॉर्डरलाइन प्रकृति की पुष्टि होने के बाद, मरीज की भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गर्भाशय, दोनों अंडाशय, लिम्फ नोड्स और ओमेंटम को भी निकालने का निर्णय लिया गया।

रोबोटिक एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. सचिन मित्तल ने बताया कि इस तरह के बड़े ट्यूमर के लिए पहले से एक विस्तृत योजना तैयार की गई थी। सभी मेडिकल रिपोर्ट्स का गहन अध्ययन किया गया ताकि ऑपरेशन के दौरान आने वाले संभावित जोखिमों को कम किया जा सके। डॉक्टरों की सटीक रणनीति और अनुभव के कारण ही यह जटिल सर्जरी बिना किसी बड़ी जटिलता के संपन्न हो सकी।

स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही पड़ सकती है भारी

चिकित्सकों का कहना है कि पेट में लगातार हो रही वृद्धि या पाचन संबंधी समस्याओं को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अक्सर लोग इसे सामान्य कब्ज या वजन बढ़ना मान लेते हैं, जो बाद में गंभीर बीमारियों का रूप ले सकता है। इस मामले में भी महिला ने शुरुआत में लक्षणों को अनदेखा किया, जिससे ट्यूमर का आकार काफी बढ़ गया। समय पर सही जांच और विशेषज्ञों से परामर्श ही ऐसी स्थितियों में जान बचाने का एकमात्र रास्ता है।

सफल सर्जरी के बाद महिला की स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है और उन्हें रिकवरी के लिए निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों की टीम ने इस उपलब्धि को एक बड़ी सफलता माना है, क्योंकि इतने बड़े ट्यूमर को सुरक्षित तरीके से हटाना चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से एक जटिल प्रक्रिया होती है। फिलहाल, मरीज स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं और डॉक्टरों के अनुसार उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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