अमेरिका में रहकर भी माटी से जुड़े रहे डॉ. घासीराम वर्मा, 100वें जन्मदिन पर समाज सेवा के जज्बे को सलाम
प्रदेश के प्रसिद्ध गणितज्ञ, अमेरिकी प्रवासी शिक्षाविद और करोड़पति फकीर के नाम से विख्यात डॉ. घासीराम वर्मा का 100वां जन्मवर्ष झुंझुनूं में भव्य समारोह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से जुड़े शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों और समाज के गणमान्य लोगों ने उनके योगदान को याद किया और उनके शतायु जीवन की कामना की।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

झुंझुनूं में मनाया गया शताब्दी समारोह
राजस्थान के झुंझुनूं में एक भावुक और प्रेरणादायक समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें प्रसिद्ध गणितज्ञ और शिक्षाविद डॉ. घासीराम वर्मा का 100वां जन्मदिन मनाया गया। 'करोड़पति फकीर' के नाम से विख्यात डॉ. वर्मा ने अपनी पूरी जिंदगी सादगी और परोपकार के नाम कर दी है। इस विशेष अवसर पर देश-विदेश से आए शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों ने उनके दीर्घायु जीवन की कामना की और उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों को याद किया।
समारोह में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, स्थानीय विधायक राजेंद्र भांबू और पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अतिथियों ने डॉ. वर्मा को माला पहनाकर और केक काटकर सम्मानित किया। इस दौरान उनके जीवन के संघर्षों और उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
छह दशक तक विदेश में रहकर भी नहीं टूटा नाता
केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने डॉ. वर्मा के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि वे शेखावाटी और राजस्थान का गौरव हैं। अमेरिका की रोड आइलैंड यूनिवर्सिटी में गणित के प्रोफेसर के रूप में छह दशक से अधिक समय बिताने के बावजूद, डॉ. वर्मा का अपनी जन्मभूमि से गहरा लगाव कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने न केवल विदेशों में अपनी विद्वता का लोहा मनवाया, बल्कि अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा अपने वतन की बेहतरी के लिए समर्पित कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान यमुना जल समझौते का जिक्र करते हुए मंत्री ने इसे क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. वर्मा जैसे महापुरुषों का आशीर्वाद और प्रेरणा ही समाज को विकास के पथ पर आगे ले जाने की शक्ति देती है।
शिक्षा के लिए 12 करोड़ का दान
डॉ. घासीराम वर्मा की दानशीलता किसी मिसाल से कम नहीं है। उन्होंने अब तक शिक्षा और सामाजिक कार्यों के लिए 12 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दान की है। सेवानिवृत्ति के बाद भी, वे अपनी पेंशन और निवेश से होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा, करीब 40 से 50 लाख रुपये प्रतिवर्ष, जरूरतमंदों और शैक्षणिक संस्थानों की मदद के लिए खर्च करते हैं। उनका मानना है कि देने की आदत ही मनुष्य को महान बनाती है।
बचपन में आर्थिक तंगी के कारण छात्रवृत्तियों के सहारे अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले डॉ. वर्मा ने आज हजारों बेटियों की शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया है। उनकी आर्थिक मदद से राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में स्कूल, कॉलेज और छात्रावासों का निर्माण हुआ है, जो विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं के लिए शिक्षा का मुख्य केंद्र बने हुए हैं।
प्रेरणा का स्रोत बना जीवन
डॉ. घासीराम वर्मा का जीवन उन लोगों के लिए एक बड़ा सबक है जो धन संचय को ही सफलता मानते हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि भौतिक सुख-सुविधाओं से ऊपर उठकर समाज के लिए किया गया कार्य ही असली पूंजी है। उनके 100वें जन्मदिन पर आयोजित इस समारोह ने न केवल उनके योगदान को सम्मानित किया, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी निस्वार्थ सेवा का संदेश दिया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!