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बड़वानी में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग की सरकारी खरीदी का आगाज, 10 अगस्त तक चलेगा अभियान

Barwani Summer Moong MSP procurement starts. बड़वानी जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी शुरू हो गई है। यह खरीदी 10 अगस्त तक जारी रहेगी।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

6 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 201
बड़वानी में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग की सरकारी खरीदी का आगाज, 10 अगस्त तक चलेगा अभियान
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बड़वानी में मूंग उपार्जन की प्रक्रिया शुरू

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में ग्रीष्मकालीन मूंग की सरकारी खरीद का कार्य आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया गया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर आधारित यह उपार्जन प्रक्रिया विपणन वर्ष 2026-27 के तहत संचालित की जा रही है। प्रशासन द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, यह खरीदी अभियान 10 अगस्त तक निरंतर जारी रहेगा, जिसके लिए जिले के किसानों ने व्यापक स्तर पर पंजीयन कराया है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग बेचने के लिए जिले के कुल 479 किसानों ने अपना पंजीयन करवाया है। इन किसानों द्वारा कुल 1007 हेक्टेयर रकबे में मूंग की फसल का उत्पादन किया गया है। पंजीयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब किसान अपनी उपज को निर्धारित केंद्रों पर बेचने के लिए स्लॉट बुकिंग कर रहे हैं, जिसमें से अब तक 11 किसानों ने स्लॉट बुक कर लिए हैं।

दो केंद्रों पर हो रही है उपज की तुलाई

किसानों की सुविधा के लिए प्रशासन ने जिले में दो मुख्य उपार्जन केंद्र निर्धारित किए हैं। पहला केंद्र सेंधवा सहकारी विपणन संस्था मर्यादित कृषि उपज मंडी सेंधवा में बनाया गया है, जबकि दूसरा केंद्र खांडेराव मार्केटिंग सहकारी संस्था (ठीकरी) कृषि उपज मंडी अंजड़ में स्थित है। इन केंद्रों पर किसानों की उपज को व्यवस्थित रूप से तौलने और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था की गई है।

उपार्जन का विधिवत शुभारंभ 6 जुलाई को अंजड़ स्थित खांडेराव मार्केटिंग सहकारी संस्था केंद्र पर किया गया। इस अवसर पर ठीकरी विकासखंड के ग्राम उचावद डेब के किसान भगवान पटेल अपनी 8.50 क्विंटल मूंग लेकर केंद्र पर पहुंचे। इस दौरान कृषि विभाग के उपसंचालक के.सी. वास्केल, सहायक संचालक एस.एल. पंवार, मंडी सचिव गणपतसिंह माली और भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष भगवान पटेल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

पारदर्शिता के लिए नई तकनीक का उपयोग

इस बार मूंग की खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्यूआर कोड स्कैनर ऐप की नई व्यवस्था लागू की गई है। इस तकनीक के माध्यम से किसान द्वारा स्लॉट बुकिंग के दौरान दर्ज कराई गई मात्रा के अनुसार ही उपज की खरीदी की जाएगी। इसके बाद सिस्टम से बिल जनरेट होगा, जिसे क्यूआर कोड स्कैनर के जरिए स्कैन किया जाएगा।

इस नई व्यवस्था से तुलाई और बोरों की संख्या में सटीक मिलान संभव हो सकेगा। बारदानों की सिलाई के बाद जब टैग को स्कैन किया जाएगा, तो किसान का संपूर्ण बायोडाटा और उपज का विवरण डिजिटल रूप से प्रदर्शित होगा। इस तकनीकी बदलाव का उद्देश्य उपार्जन केंद्रों पर होने वाली किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकना और किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य और वजन सुनिश्चित कराना है।

किसानों के लिए आगामी निर्देश

कृषि विभाग ने सभी पंजीकृत किसानों से अपील की है कि वे अपनी स्लॉट बुकिंग समय रहते सुनिश्चित करें ताकि 10 अगस्त की समय-सीमा के भीतर उनकी उपज का उपार्जन किया जा सके। केंद्रों पर भीड़ से बचने और सुचारू रूप से कार्य संपन्न करने के लिए स्लॉट के अनुसार ही उपज लेकर आने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन का प्रयास है कि मूंग उत्पादक किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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