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उदयपुर: डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन कराने के नाम पर 30 हजार की रिश्वत लेते दलाल गिरफ्तार, संयुक्त निदेशक फरार

Rajasthan ACB arrest agent for bribe in Udaipur doctor registration. चिकित्सा विभाग जेडी का दलाल 30 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

11 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 873
उदयपुर: डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन कराने के नाम पर 30 हजार की रिश्वत लेते दलाल गिरफ्तार, संयुक्त निदेशक फरार
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एसीबी की बड़ी कार्रवाई: दलाल रंगे हाथों पकड़ा गया

उदयपुर में चिकित्सा विभाग के कार्यालय में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। बांसवाड़ा की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक के नाम पर रिश्वत लेने वाले एक दलाल को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अब्दुल कादिर के रूप में हुई है, जो डॉक्टर के पंजीयन की स्वीकृति के बदले पैसे वसूल रहा था।

मामले की शुरुआत तब हुई जब एक परिवादी ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे अपनी लैब में सोनोग्राफी मशीन के संचालन के लिए एक रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर का नाम जुड़वाना था। इस प्रक्रिया के लिए उसे चिकित्सा विभाग से पंजीयन स्वीकृति की आवश्यकता थी। आरोप है कि इस काम के एवज में विभाग के अधिकारियों द्वारा 1.30 लाख रुपये की मोटी रिश्वत की मांग की गई थी।

ट्रैप की योजना और दलाल की गिरफ्तारी

शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले का सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई। एसीबी के उपमहानिरीक्षक डॉ. रामेश्वर सिंह के मार्गदर्शन और पुलिस उपअधीक्षक रतनसिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि संयुक्त निदेशक डॉ. रतन बिलवाल की ओर से दलाल अब्दुल कादिर के माध्यम से 30 हजार रुपये की रिश्वत राशि लेने पर सहमति बनी थी।

शुक्रवार को जब दलाल अब्दुल कादिर रिश्वत के 30 हजार रुपये लेने पहुंचा, तो एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया। हालांकि, जैसे ही उसे कार्रवाई की भनक लगी, उसने रिश्वत की राशि को कार्यालय में ही फेंक दिया और वहां से भागने की कोशिश की। एसीबी के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए उसका पीछा किया और उसे पकड़ लिया।

अधिकारी कार्यालय छोड़कर फरार

इस पूरी घटनाक्रम के दौरान चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. रतन बिलवाल मौके से फरार होने में सफल रहे। एसीबी की कार्रवाई की सूचना मिलते ही वे कार्यालय छोड़कर निकल गए। फिलहाल, एसीबी की टीम उनकी तलाश में जुटी है और मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों की निगरानी में आगे की जांच की जा रही है।

एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और महानिरीक्षक एस. परिमला के सुपरवीजन में गिरफ्तार दलाल से गहन पूछताछ की जा रही है। एसीबी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस भ्रष्टाचार के जाल में और कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं और लंबे समय से यह खेल कैसे चल रहा था।

कानूनी कार्रवाई और आगे की स्थिति

आरोपी अब्दुल कादिर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। एसीबी अब साक्ष्यों को जुटाने में लगी है ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। इस घटना ने चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए भी रिश्वत की मांग की जा रही थी।

फिलहाल, विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और फरार अधिकारी की गिरफ्तारी के लिए एसीबी की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। इस मामले में आगे की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस भ्रष्टाचार के नेटवर्क में और कितने लोग संलिप्त हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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