सीतामढ़ी: आरटीआई में लापरवाही पर जिला प्रबंधक को 25 हजार का जुर्माना, सूचना आयोग ने लिया कड़ा संज्ञान
Bihar State Information Commission imposes penalty on Sitamarhi official for RTI negligence. राज्य खाद्य निगम, सीतामढ़ी के जिला प्रबंधक संतोष कुमार पर बिहार सूचना आयोग ने 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी देने में करीब दो साल की देरी और लापरवाही बरतने के लिए की गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

बिहार के सीतामढ़ी जिले में सूचना का अधिकार (RTI) कानून के प्रति बरती गई लापरवाही पर राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य खाद्य निगम के जिला प्रबंधक संतोष कुमार पर आयोग ने 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। यह कार्रवाई आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी को उपलब्ध कराने में करीब दो साल की लंबी देरी और उदासीनता के कारण की गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला नानपुर थाना क्षेत्र के नौवाड़ीह निवासी मिट्टू कुमार द्वारा दायर आरटीआई आवेदन से जुड़ा है। आवेदक ने समय पर वांछित सूचना न मिलने के बाद 1 सितंबर 2023 को बिहार सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयुक्त प्रकाश कुमार ने पाया कि संबंधित अधिकारी ने न केवल सूचना देने में देरी की, बल्कि कानून के प्रावधानों का भी पालन नहीं किया।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरटीआई आवेदन का एक हिस्सा संबंधित विभाग से संबंधित नहीं था। आरटीआई अधिनियम के नियमों के अनुसार, ऐसे आवेदन को पांच दिनों के भीतर संबंधित विभाग को स्थानांतरित किया जाना अनिवार्य था। हालांकि, राज्य खाद्य निगम ने इस प्रक्रिया में घोर लापरवाही बरती और आवेदन को जिला आपूर्ति पदाधिकारी के पास भेजने में लगभग दो साल का समय लगा दिया।
आयोग की सख्त टिप्पणी और आदेश
राज्य सूचना आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जिला प्रबंधक संतोष कुमार ने सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई और जानबूझकर सूचना देने में विलंब किया। आयोग ने इसे कानून का सीधा उल्लंघन मानते हुए अधिनियम की धारा 20(1) के तहत 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का फैसला सुनाया। आयोग ने इस जुर्माने को अधिकारियों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा है।
जुर्माने की वसूली सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने सीतामढ़ी के जिलाधिकारी, कोषागार पदाधिकारी और महालेखाकार, बिहार को आदेश की प्रति भेज दी है। इन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जुर्माने की राशि की वसूली सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त, जिला आपूर्ति पदाधिकारी को यह निर्देश दिया गया है कि वे अपीलकर्ता को लंबित सूचनाएं तत्काल प्रभाव से उपलब्ध कराएं।
प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
सूचना आयोग की इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में आरटीआई आवेदनों के प्रति अपनाई जाने वाली कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि जब तक अधिकारी आरटीआई के प्रति जवाबदेह नहीं होंगे, तब तक पारदर्शिता का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा। दो साल तक एक साधारण आवेदन को लटकाए रखना प्रशासनिक तंत्र की कार्यक्षमता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
आयोग के इस फैसले को आरटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस जुर्माने के बाद जिले के अन्य विभागों में भी आरटीआई आवेदनों के निस्तारण में तेजी आएगी और अधिकारी समयबद्ध तरीके से सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल, संबंधित जिला प्रबंधक की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
