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शहडोल मेडिकल कॉलेज में 24 घंटे से बिजली गुल, मरीजों की बढ़ी मुश्किलें

मेडिकल कॉलेज में 24 घंटे से ब्लैकआउट। जनरेटर-यूपीएस से इलाज जारी, मरीज हो रहे बेहाल।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
शहडोल मेडिकल कॉलेज में 24 घंटे से बिजली गुल, मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
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शहडोल संभाग के सबसे बड़े बिरसा मुंडा शासकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पिछले 24 घंटों से बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। मुख्य विद्युत आपूर्ति ठप होने के कारण अस्पताल परिसर में अंधेरा और उमस का माहौल है, जिससे वहां भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच पंखे और कूलर बंद होने से मरीजों की स्थिति और अधिक नाजुक हो गई है।

तकनीकी खराबी से बाधित हुई व्यवस्था

अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार से ही मेडिकल कॉलेज परिसर की मुख्य बिजली लाइन में गंभीर तकनीकी खराबी आ गई थी। इस इलेक्ट्रिकल फॉल्ट के कारण वार्डों, ओपीडी, प्रतीक्षालय और अन्य सामान्य क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति बाधित हो गई। बिजली न होने के कारण अस्पताल में भर्ती बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को उमस भरी गर्मी में घंटों बिताने पड़ रहे हैं।

अस्पताल के वार्डों में बिजली न होने से मरीजों के परिजनों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। पंखे और अन्य बिजली उपकरणों के काम न करने से वार्डों के भीतर का तापमान काफी बढ़ गया है, जिससे मरीजों की बेचैनी बढ़ रही है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए मरीजों को राहत देने का प्रयास किया जा रहा है।

वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे इलाज

मेडिकल कॉलेज अधीक्षक डॉ. नागेंद्र सिंह ने बताया कि बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद से ही अस्पताल की महत्वपूर्ण सेवाओं को जनरेटर और यूपीएस बैकअप के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, इमरजेंसी वार्ड, लेबर रूम और पैथोलॉजी लैब जैसी अति आवश्यक सेवाओं में कोई बाधा नहीं आने दी गई है। इन विभागों में बिजली की निरंतरता बनाए रखने के लिए वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग किया जा रहा है।

अधीक्षक के अनुसार, मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है। हालांकि, जनरेटर और यूपीएस पर निर्भरता के कारण अन्य सामान्य वार्डों में बिजली की उपलब्धता सीमित है, जिससे वहां भर्ती मरीजों को असुविधा हो रही है। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों के परिजनों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है।

जबलपुर से बुलाई गई विशेषज्ञ टीम

तकनीकी खराबी को दूर करने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रयास जारी हैं, लेकिन फॉल्ट की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर से विशेषज्ञों की एक टीम को बुलाया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि विशेषज्ञ टीम के पहुंचने के बाद ही मुख्य बिजली आपूर्ति को पूरी तरह से बहाल किया जा सकेगा। फिलहाल, अस्पताल प्रबंधन इस दिशा में तेजी से काम करने का दावा कर रहा है।

इतने लंबे समय तक बिजली संकट बने रहने से अस्पताल की वैकल्पिक व्यवस्था और तकनीकी रखरखाव की तैयारियों पर भी सवाल उठने लगे हैं। मरीजों के परिजनों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में बिजली का बैकअप सिस्टम और अधिक मजबूत होना चाहिए ताकि किसी भी स्थिति में मरीजों को परेशानी न हो। अब सभी की निगाहें बिजली बहाली के काम पर टिकी हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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