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रेवाड़ी स्वास्थ्य विभाग में 28 लाख का फ्लैक्स बोर्ड घोटाला: 6 डॉक्टर चार्जशीट, फर्म ब्लैकलिस्ट

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

9 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
रेवाड़ी स्वास्थ्य विभाग में 28 लाख का फ्लैक्स बोर्ड घोटाला: 6 डॉक्टर चार्जशीट, फर्म ब्लैकलिस्ट
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आयुष्मान भारत योजना के तहत हुआ था फर्जीवाड़ा

रेवाड़ी जिले में स्वास्थ्य एवं वैलनेस केंद्रों पर फ्लैक्स बोर्ड लगाने के नाम पर हुए करीब 28 लाख रुपये के घोटाले में सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। वर्ष 2022-23 के दौरान आयुष्मान भारत योजना के तहत हुए इस वित्तीय अनियमितता के मामले में विभाग ने तत्कालीन उप सिविल सर्जन डॉ. राजबीर सिंह सहित कुल छह सरकारी डॉक्टरों को चार्जशीट करने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह कार्रवाई हरियाणा सिविल सेवा (दंड तथा अपील) नियम, 2016 के नियम-7 के तहत की गई है।

विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों के अनुसार, इन सभी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय एडीए से आरोप पत्रों का प्रारूप तैयार करवाया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 15 दिनों के भीतर यह प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट सौंपी जाए। इस घोटाले में न केवल डॉक्टरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, बल्कि निजी फर्म पर भी गाज गिरी है।

निजी फर्म ब्लैकलिस्ट और सिक्योरिटी राशि जब्त

जांच में सामने आया कि यादव प्रिंट आर्ट नामक निजी फर्म ने फर्जी बिल बनाकर सरकारी खजाने से भुगतान प्राप्त किया था। इस गंभीर अनियमितता को देखते हुए प्रशासन ने उक्त फर्म को ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय लिया है। साथ ही, फर्म की सिक्योरिटी राशि को भी जब्त करने के आदेश दिए गए हैं। यह फर्म स्वास्थ्य केंद्रों पर फ्लैक्स बोर्ड लगाने के कार्य में संलिप्त थी।

इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2014 में स्वास्थ्य विभाग से वीआरएस ले चुके डॉ. लेखराम मेहरा की शिकायत से हुई थी। डॉ. मेहरा ने सबूतों के साथ इस भ्रष्टाचार की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी थी। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई में काफी समय लगा, लेकिन अंततः सरकार ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कड़ा रुख अपनाया है।

विजिलेंस जांच और अधिकारियों पर कार्रवाई

विजिलेंस विभाग द्वारा की गई जांच में इस घोटाले की परतें खुलीं। जांच का दायरा बढ़ाते हुए अब पूरी परचेज और इंस्पेक्शन कमेटी को जांच के दायरे में लिया गया है। गौरतलब है कि इस मामले में तत्कालीन उप सिविल सर्जन डॉ. राजबीर सिंह को वर्ष 2025 में निलंबित भी किया गया था, और बताया जा रहा है कि वे अभी तक बहाल नहीं हुए हैं।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह घोटाला सरकारी धन के दुरुपयोग का एक बड़ा मामला है। जिस तरह से बिना कार्य किए या मानकों को दरकिनार कर भुगतान निकाला गया, उसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब 15 दिन की समय सीमा के भीतर आरोप पत्र तैयार होने के बाद आगे की विभागीय कार्रवाई की दिशा तय होगी।

इस मामले में शामिल अन्य डॉक्टरों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। सरकार का यह कदम भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को दर्शाता है। स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई की काफी चर्चा है, क्योंकि लंबे समय से इस घोटाले के दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही थी।

आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि इस घोटाले में और कौन-कौन से अधिकारी या कर्मचारी सीधे तौर पर दोषी पाए जाते हैं। फिलहाल, विभाग ने अपनी पूरी मशीनरी को इस मामले की फाइलें दुरुस्त करने और जवाबदेही तय करने में लगा दिया है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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