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रेवाड़ी भाजपा में बगावत के सुर: सीएम के कार्यक्रम से दूरी बनाने वाले मंडल अध्यक्षों को नोटिस

High drama in Haryana BJP as show-cause notices are served to Rewari Mandal presidents for skipping CM Nayab Saini and Union Minister Shivraj Singh Chouhan

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

6 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 426
रेवाड़ी भाजपा में बगावत के सुर: सीएम के कार्यक्रम से दूरी बनाने वाले मंडल अध्यक्षों को नोटिस
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हरियाणा के रेवाड़ी जिले में भाजपा के भीतर उपजा आंतरिक विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। बावल में आयोजित एक महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम से पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पार्टी संगठन ने उन मंडल अध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जो मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए थे।

अनुशासनहीनता पर संगठन का कड़ा रुख

पार्टी के जिला महामंत्री द्वारा एक जुलाई को जारी किए गए नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के कार्यक्रम से दूरी बनाना अनुशासन के दायरे में नहीं आता है। नोटिस में संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 24 घंटे के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण कार्यालय में जमा करें। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया या निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो पार्टी उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने पर विचार करेगी।

यह पूरा घटनाक्रम 30 जून को बावल के कृषि कॉलेज में हुए 'खेत बचाओ अभियान' के समापन समारोह से जुड़ा है। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री की मौजूदगी थी, लेकिन स्थानीय सांसद, विधायक और कई प्रमुख पदाधिकारी कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंचे। इस अनुपस्थिति को राजनीतिक विश्लेषक संगठन के भीतर चल रही खींचतान और बगावत के रूप में देख रहे हैं।

प्रेशर पॉलिटिक्स और राजनीतिक चर्चाएं

कार्यक्रम में नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग इसे प्रोटोकॉल की अनदेखी मान रहे हैं, तो वहीं कई इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल से पहले की 'प्रेशर पॉलिटिक्स' के रूप में देख रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि कार्यक्रम में शामिल न होने वाले कुछ विधायक अगले ही दिन मुख्यमंत्री के ऑनलाइन उद्घाटन कार्यक्रमों में सक्रिय दिखे और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात भी की, जिससे राजनीतिक स्थिति और अधिक उलझ गई है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की समीक्षा के लिए चंडीगढ़ से लेकर स्थानीय स्तर तक बैठकों का दौर जारी है। संगठन ने इस मामले की जांच के लिए गोपनीय तरीके से टीमें भी तैनात की हैं, जो जमीनी हकीकत का पता लगा रही हैं। हालांकि, पार्टी ने कुछ ऐसे पदाधिकारियों को नोटिस के दायरे से बाहर रखा है जो संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिसके कारण पार्टी के भीतर ही अब सवाल उठने लगे हैं।

भविष्य की राह और संगठन की परीक्षा

भाजपा खुद को देश का सबसे अनुशासित संगठन होने का दावा करती रही है, लेकिन रेवाड़ी का यह मामला पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पार्टी वास्तव में अनुशासन का डंडा चलाती है या फिर इस बगावत को शांत करने के लिए कोई बीच का रास्ता निकाला जाता है। फिलहाल, घटना के एक सप्ताह बाद भी यह विषय जिले की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

आने वाले दिनों में मंडल अध्यक्षों के जवाब और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों से यह स्पष्ट हो पाएगा कि रेवाड़ी भाजपा में चल रही यह खींचतान किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल, स्थानीय स्तर पर संगठन की कार्यप्रणाली और नेताओं के आपसी तालमेल पर सवालिया निशान जरूर लग गए हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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