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राजस्थान में ड्रग माफियाओं पर कड़ा प्रहार: 6 महीने में 60 करोड़ की संपत्ति जब्त, बुलडोजर से ढहाए गए आलीशान ठिकाने

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

12 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 952
राजस्थान में ड्रग माफियाओं पर कड़ा प्रहार: 6 महीने में 60 करोड़ की संपत्ति जब्त, बुलडोजर से ढहाए गए आलीशान ठिकाने
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नशे के सौदागरों के खिलाफ राजस्थान पुलिस का बड़ा अभियान

राजस्थान में मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले माफियाओं के खिलाफ पुलिस ने अब कमर कस ली है। राज्य भर में नशा तस्करों के आर्थिक साम्राज्य को नेस्तनाबूद करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस साल एनडीपीएस एक्ट के तहत अब तक 58 बड़ी कार्रवाइयां की गई हैं, जिसमें तस्करों द्वारा अवैध तरीके से अर्जित की गई करीब 60 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त या फ्रीज किया गया है।

इस अभियान की शुरुआत प्रतापगढ़ जिले से हुई थी, जिसे अब पूरे प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य केवल तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि उनके द्वारा खड़े किए गए अवैध संपत्ति के नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करना है। इस रणनीति के तहत अपराधियों के आलीशान बंगलों और फार्महाउसों को चिन्हित कर उन पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई भी की जा रही है।

प्रतापगढ़ और झालावाड़ बने कार्रवाई का केंद्र

आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में सबसे अधिक कार्रवाई प्रतापगढ़ और झालावाड़ जिलों में दर्ज की गई है। इन दोनों जिलों में ही करीब 32 करोड़ रुपये की संपत्ति को फ्रीज किया गया है। प्रतापगढ़ जिला इस अभियान में सबसे आगे है, जहां 10 बड़ी कार्रवाइयों के जरिए तस्करों की 16.75 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति को कुर्क किया गया है। हाड़ौती और मेवाड़ अंचल में तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए पुलिस विशेष सतर्कता बरत रही है।

प्रतापगढ़ में करीम, धर्मचंद, उस्मान, शाहरूख और याकूब जैसे कुख्यात तस्करों के आलीशान फार्महाउसों को प्रशासन ने जमींदोज कर दिया है। ये संपत्तियां मादक पदार्थों की तस्करी से कमाए गए काले धन से बनाई गई थीं। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई से नशा माफियाओं में हड़कंप मच गया है और उनके हौसले पस्त होते नजर आ रहे हैं।

आर्थिक चोट से टूटेगा तस्करी का नेटवर्क

विशेषज्ञों का मानना है कि नशा तस्करों को जेल भेजने के साथ-साथ उनकी आर्थिक कमर तोड़ना बेहद जरूरी है। जब तक तस्करों की संपत्ति जब्त नहीं होती, तब तक वे जेल से बाहर आकर फिर से अपना नेटवर्क खड़ा कर लेते हैं। पुलिस की वर्तमान रणनीति इसी दिशा में काम कर रही है ताकि तस्करी के जरिए कमाई गई संपत्ति का उपयोग अपराधी दोबारा अपराध करने में न कर सकें।

राज्य के अन्य जिलों में भी पुलिस प्रशासन अब इसी मॉडल को अपना रहा है। एनडीपीएस एक्ट की धाराओं का कड़ाई से पालन करते हुए पुलिस उन सभी संपत्तियों का ब्यौरा जुटा रही है जो तस्करी के पैसे से खरीदी गई हैं। आने वाले समय में इस अभियान का दायरा और अधिक बढ़ने की संभावना है, जिससे नशा मुक्त राजस्थान का सपना साकार हो सके।

आगे की राह और पुलिस की सतर्कता

पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के कप्तानों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में सक्रिय ड्रग माफियाओं की सूची तैयार करें और उनकी अवैध संपत्तियों को चिन्हित कर कानूनी प्रक्रिया पूरी करें। इस अभियान की सफलता के बाद अब पुलिस का ध्यान उन बड़े सरगनाओं पर है जो पर्दे के पीछे रहकर तस्करी का संचालन करते हैं। तस्करों के खिलाफ जारी यह मुहिम अब एक जन आंदोलन का रूप ले रही है, जिसमें स्थानीय प्रशासन और पुलिस का समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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