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प्रयागराज: जमीन बंटवारे के लंबित मामलों पर डीएम मनीष कुमार वर्मा सख्त, अधिकारियों को दी चेतावनी

Prayagraj land dispute resolution delay; DM Manish Kumar Verma expresses anger. प्रयागराज में जमीन के विवादों को सुलझाने में सभी तहसीलों के तहसीलदार और उप जिलाधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं। शुक्रवार देर शाम संगम सभागार में आईजीआरएस और राजस्व कार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा को यह जानकारी मिली।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

10 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 429
प्रयागराज: जमीन बंटवारे के लंबित मामलों पर डीएम मनीष कुमार वर्मा सख्त, अधिकारियों को दी चेतावनी
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राजस्व कार्यों में लापरवाही पर डीएम की नाराजगी

प्रयागराज में राजस्व विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने गहरी नाराजगी जताई है। संगम सभागार में आयोजित आईजीआरएस और राजस्व कार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि तहसील स्तर पर जमीन से जुड़े मामलों के निस्तारण में भारी कोताही बरती जा रही है। डीएम ने साफ तौर पर कहा कि जनता की समस्याओं के प्रति अधिकारियों का यह उदासीन रवैया किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, जिले की विभिन्न तहसीलों में जमीन बंटवारे यानी धारा-116 के 95 मामले ऐसे हैं जो पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से फाइलों में दबे पड़े हैं। इसके अतिरिक्त, धारा-24 के तहत पैमाइश और पत्थरगणी से संबंधित 50 मामले भी तीन वर्षों से लंबित पाए गए हैं। इन आंकड़ों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

15 जुलाई तक निस्तारण का अल्टीमेटम

जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे इस महीने के अंत तक सभी लंबित राजस्व मामलों का निस्तारण सुनिश्चित करें। विशेष रूप से अंश निर्धारण से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देते हुए 15 जुलाई तक सुलझाने का आदेश दिया गया है। डीएम ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में सुधार और अन्य लंबित मामलों को अब और अधिक समय तक लटकाए नहीं रखा जा सकता।

बैठक के दौरान डीएम ने स्वयं 8 गंभीर शिकायतकर्ताओं की सुनवाई की। ये मामले मुख्य रूप से चकमार्ग पर अवैध कब्जे, सीमा विवाद और पत्थरगणी से जुड़े थे। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे केवल कार्यालय में बैठकर काम न करें, बल्कि मौके पर जाकर निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण तरीके से विवादों का समाधान करें।

दाखिल-खारिज में देरी पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी

म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज के मामलों में खराब प्रदर्शन करने वाली तहसीलों के लिए डीएम ने विशेष अभियान चलाने का आदेश दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर निर्धारित समय सीमा से अधिक कोई भी म्यूटेशन प्रकरण लंबित पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारी और पटल प्रभारी के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, धारा-34, धारा-80 और धारा-116 के तहत खराब रैंकिंग वाली तहसीलों की अब विशेष निगरानी की जाएगी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि राजस्व कार्यों में पारदर्शिता और गति लाना उनकी प्राथमिकता है, और इसमें किसी भी प्रकार की हीलाहवाली करने वाले कर्मचारियों या अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।

भविष्य की कार्ययोजना और जवाबदेही

आगामी दिनों में राजस्व विभाग के कामकाज की निरंतर समीक्षा की जाएगी ताकि लंबित मामलों की संख्या को शून्य पर लाया जा सके। डीएम के इस कड़े रुख से तहसील स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस प्रशासनिक सख्ती के बाद जमीन से जुड़े विवादों के निपटारे में तेजी आएगी और आम नागरिकों को राहत मिलेगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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