बदायूं: अफीम तस्करों को 8 लाख रुपये लेकर छोड़ने का आरोप, एक सिपाही लाइन हाजिर
बदायूं के इस्लामनगर थाने में तीन कथित अफीम तस्करों को पकड़ने के बाद कार्रवाई करने के बजाय आठ लाख रुपये लेकर छोड़ने का मामला अब पुलिस महकमे के लिए गले की फांस बन गया है। मंगलवार देर रात एसएसपी अंकिता शर्मा ने मामले में एक सिपाही को लाइन हाजिर कर दिया, जबकि तीन अन्य को इस्लामनगर थाने से हटाकर अलग-अलग थानों में भेज दिया।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

इस्लामनगर थाने में सौदेबाजी का गंभीर मामला
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस्लामनगर थाना क्षेत्र में अफीम तस्करी के आरोप में पकड़े गए तीन युवकों को कथित तौर पर आठ लाख रुपये की रिश्वत लेकर छोड़ने का मामला सामने आया है। इस घटना ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों को जिम्मेदार ठहराया है।
घटना की शुरुआत शनिवार रात हुई, जब इस्लामनगर पुलिस ने बरेली के सिरौली क्षेत्र के दो लोगों समेत कुल तीन युवकों को हिरासत में लिया था। सूत्रों के अनुसार, इन युवकों के पास से अफीम बरामद हुई थी और वे तस्करी के काम में लिप्त थे। पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद कानूनी कार्रवाई करने के बजाय, उन्हें थाने में ही रखकर छोड़ने के लिए सौदेबाजी शुरू कर दी गई।
आठ लाख रुपये में तय हुआ सौदा
आरोप है कि तीनों युवकों को छोड़ने के बदले आठ लाख रुपये की मांग की गई। चर्चा है कि यह रकम ऑनलाइन लेने का भी प्रयास किया गया था, लेकिन अंततः नकद भुगतान के जरिए सौदा पूरा किया गया। रविवार सुबह तक इन तीनों तस्करों को थाने से रिहा कर दिया गया, जिससे पुलिस की छवि धूमिल हुई है। मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद विभागीय जांच के आदेश दिए गए।
जांच में इस्लामनगर थाने के चार सिपाहियों—अनुज चौधरी, काले सिंह, कपिल कुमार और रितिक तेवतिया की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इन चारों पर आरोप है कि वे तस्करों को पकड़ने से लेकर उन्हें छोड़ने तक की पूरी डीलिंग में शामिल थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी अंकिता शर्मा ने रितिक तेवतिया को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है।
पुलिसकर्मियों के तबादले और विभागीय जांच
लाइन हाजिर की कार्रवाई के अलावा, अन्य तीन सिपाहियों को भी इस्लामनगर थाने से हटा दिया गया है। अनुज चौधरी को फैजगंज बेहटा, काले सिंह को मुजरिया और कपिल कुमार को हजरतपुर थाने में तैनात किया गया है। स्थानीय स्तर पर इन पुलिसकर्मियों की कार्यशैली को लेकर पहले भी चर्चाएं रही हैं, विशेषकर रितिक तेवतिया को लेकर, जो पिछले कुछ समय से थाने में तैनात था।
पूरे प्रकरण की विभागीय जांच अब एसपी सिटी अभिषेक सिंह को सौंपी गई है। एसपी देहात डॉ. हृदेश कठेरिया ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस विभाग ने इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतने के संकेत दिए हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
इस घटना ने बदायूं पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां पुलिस अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ थाने के भीतर ही इस तरह की सौदेबाजी का होना पुलिसिंग सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। अब सभी की निगाहें एसपी सिटी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि क्या इसमें और भी बड़े अधिकारी या अन्य कर्मचारी शामिल थे।
आने वाले दिनों में जांच के नतीजे तय करेंगे कि क्या इन पुलिसकर्मियों पर केवल प्रशासनिक तबादले की गाज गिरेगी या उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा। फिलहाल, पूरे जिले में इस मामले की चर्चा जोरों पर है और पुलिस विभाग अपनी छवि सुधारने के लिए दबाव में है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!