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पटना साइंस कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप: पर्दे पर 70 हजार खर्च और कैंटीन टेंडर पर उठे सवाल

Patna Science College canteen tender scam, curtains worth ₹70,000. पटना साइंस कॉलेज के एक कमरे में पर्दे लगाने पर लगभग 70,000 रुपये खर्च किए गए। इसके साथ ही कॉलेज में कैंटीन टेंडर प्रक्रिया में भी धांधली हुई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1K
पटना साइंस कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप: पर्दे पर 70 हजार खर्च और कैंटीन टेंडर पर उठे सवाल
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पटना साइंस कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप

बिहार की राजधानी स्थित प्रतिष्ठित पटना साइंस कॉलेज इन दिनों वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों से घिर गया है। कॉलेज प्रशासन पर आरोप है कि संस्थान के एक कमरे में पर्दे लगाने के नाम पर लगभग 70,000 रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई है। इस फिजूलखर्ची ने न केवल छात्रों के बीच बल्कि शैक्षणिक गलियारों में भी चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

पर्दे पर हुए इस खर्च के अलावा, कॉलेज में कैंटीन के लिए जारी किए गए टेंडर की प्रक्रिया पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखा गया और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा, जिससे कॉलेज प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।

टेंडर प्रक्रिया में धांधली और एक ही व्यक्ति को प्राथमिकता

पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के अध्यक्ष शांतनु शेखर ने इस मामले को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उनका मुख्य आरोप है कि कैंटीन टेंडर प्रक्रिया के दौरान एक ही व्यक्ति को दो बार टेंडर जमा करने की अनुमति दी गई, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि जब कॉलेज में पहले से ही एक कैंटीन संचालित है, तो नई कैंटीन खोलने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

छात्रसंघ अध्यक्ष ने इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि कॉलेज प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पर्दे खरीदने का आधार क्या था और किस आधार पर टेंडर प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। उन्होंने कॉलेज की प्रिंसिपल से मुलाकात कर इन सभी बिंदुओं पर जवाब मांगा है।

प्रशासन से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग

शांतनु शेखर ने जोर देकर कहा कि पटना साइंस कॉलेज एक ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित संस्थान है, जिसकी गरिमा बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की है कि यदि कॉलेज प्रशासन ने सभी कार्य नियमानुसार किए हैं, तो संबंधित दस्तावेजों और खर्चों का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि छात्रों और आम जनता के मन में उठ रहे संदेह दूर हो सकें।

छात्रसंघ का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के हितों के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। पारदर्शिता के अभाव में संस्थान की छवि धूमिल होती है, जिसका सीधा असर छात्रों के मनोबल पर पड़ता है। प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।

आगे क्या हो सकता है?

वर्तमान में छात्रसंघ अध्यक्ष द्वारा उठाए गए इन सवालों के बाद कॉलेज प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। यदि प्रशासन इन आरोपों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाता है, तो भविष्य में छात्र संगठन आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं। इस मामले ने विश्वविद्यालय प्रशासन के स्तर पर भी चर्चाओं को जन्म दिया है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कॉलेज प्रशासन इन वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर कोई ठोस दस्तावेज पेश करता है या फिर इस मामले की जांच के लिए कोई उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाता है। फिलहाल, छात्र और शिक्षक वर्ग इस पूरे प्रकरण पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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