बालोतरा में साइबर ठगों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब: कमीशन के लालच में बैंक खाते और सिम बेचने वाले दो गिरफ्तार
बालोतरा पुलिस ने साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 96.22 लाख रुपए के संदिग्ध ऑनलाइन लेन-देन का खुलासा हुआ है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

कमीशन के लालच में साइबर अपराधियों को सौंपे थे बैंक खाते
राजस्थान के बालोतरा में पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी चंद रुपयों के कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते और उनसे जुड़ी सिम कार्ड साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। पुलिस की प्रारंभिक जांच में इन खातों के माध्यम से करीब 96.22 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है।
पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार कॉवट के अनुसार, जिले में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में संदिग्ध बैंक खातों और साइबर हॉटस्पॉट की निगरानी की जा रही थी। बालोतरा थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सवाई सिंह और कर्णपाल नामक दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया है। ये दोनों आरोपी लंबे समय से साइबर ठगों के लिए 'म्यूल अकाउंट' के रूप में काम कर रहे थे।
देशभर में दर्ज हैं ठगी के मामले
जांच के दौरान जब पुलिस ने इन बैंक खातों की 'समन्वय पोर्टल' पर पड़ताल की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इन खातों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में साइबर धोखाधड़ी की कई शिकायतें पहले से ही दर्ज थीं। आरोपियों ने अपने बैंक खातों के साथ-साथ उन खातों से लिंक मोबाइल सिम कार्ड भी ठगों को सौंप दिए थे। इन सिम कार्डों का उपयोग ठग ओटीपी प्राप्त करने, बैंक वेरिफिकेशन पूरा करने और पीड़ितों को झांसे में लेने के लिए करते थे।
पुलिस के अनुसार, यह एक संगठित गिरोह का हिस्सा है। आरोपी सवाई सिंह और कर्णपाल ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे कमीशन के बदले में अपने बैंक खाते और सिम कार्ड साइबर अपराधियों को मुहैया कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को खपाने और उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था, ताकि पुलिस की पकड़ से बचा जा सके।
मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी पुलिस
फिलहाल, बालोतरा पुलिस इन दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। साइबर थाना डीएसपी बाबूलाल मुरारिया के सुपरविजन में गठित टीम अब उन अन्य सहयोगियों की पहचान कर रही है जो इस अवैध काम में शामिल हैं।
पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपने बैंक खाते या सिम कार्ड किसी भी अनजान व्यक्ति को न दें। किसी भी प्रलोभन में आकर अपने दस्तावेजों का दुरुपयोग होने देना कानूनी रूप से गंभीर अपराध है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।
इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी किस तरह से स्थानीय लोगों को मोहरा बनाकर अपनी ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस अब इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
