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पटना में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: 14.67 करोड़ के फ्रॉड में शामिल 4 गिरफ्तार

Patna cyber fraud gang arrested for mule bank account scam. बिहार में साइबर अपराध के खिलाफ साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई ने बड़ी कार्रवाई की है। साइबर ठगी से जुटाए रकम को बैंक खातों के जरिए ठिकाने लगाने वाले संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

18 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 891
पटना में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: 14.67 करोड़ के फ्रॉड में शामिल 4 गिरफ्तार
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बिहार की राजधानी पटना में साइबर अपराध और सुरक्षा इकाई ने एक बड़े संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह साइबर ठगी के जरिए हासिल की गई करोड़ों की राशि को ठिकाने लगाने का काम करता था। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।

म्यूल खातों के जरिए होता था पैसों का लेन-देन

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी विभिन्न बैंकों में फर्जी या 'म्यूल' बैंक खाते खुलवाते थे। साइबर ठगी के शिकार लोगों से ठगी गई रकम सबसे पहले इन्हीं खातों में मंगवाई जाती थी। इसके बाद, इस धनराशि को अलग-अलग डिजिटल माध्यमों से आगे स्थानांतरित कर दिया जाता था। शुरुआती जांच के संकेत बताते हैं कि इस रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशी संचालकों, विशेषकर चीन में बैठे साइबर अपराधियों तक पहुंचाया जा रहा था।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान गौतम गंभीर (कंकड़बाग), तनय सिंह (रामकृष्णा नगर), सुमित राज (हिलसा, नालंदा) और विवान सिंह (कंकड़बाग) के रूप में हुई है। पटना के साइबर थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस इस पूरे रैकेट की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैंक दस्तावेज बरामद किए हैं। इनमें 4 मोबाइल फोन, 6 बैंक पासबुक, 13 एटीएम कार्ड, 10 चेकबुक, 6 मोहर, एक क्यूआर पेमेंट कोड और 8 सिम कार्ड शामिल हैं। पुलिस इन उपकरणों की फोरेंसिक जांच करवा रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके द्वारा संचालित अन्य खातों का पता लगाया जा सके।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि जब्त किए गए बैंक खातों का संबंध देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर ठगी के मामलों से है। इन खातों के जरिए करीब 14 करोड़ 67 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन किया गया है। पुलिस को संदेह है कि यह गिरोह एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का हिस्सा है।

बैंक कर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

इस मामले में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। पुलिस की जांच के अनुसार, आरोपी कुछ बैंक कर्मियों की मिलीभगत से कॉरपोरेट बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम को खपाने के लिए किया जाता था। पुलिस अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि किन बैंक अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर ये खाते खोलने में मदद की।

फिलहाल पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं ताकि इस गिरोह के मास्टरमाइंड और विदेशी संपर्कों तक पहुंचा जा सके। साइबर सुरक्षा इकाई का मानना है कि इस गिरफ्तारी से साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क की कमर टूटी है, लेकिन अभी भी कई कड़ियां सुलझानी बाकी हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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