पलवल अस्पताल में मोबाइल टॉर्च की रोशनी में प्रसव का मामला: जांच के लिए बनी कमेटी, सामने आई बड़ी तकनीकी चूक
पलवल के जिला नागरिक अस्पताल में मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में गर्भवती महिला की सिजेरियन डिलीवरी किए जाने का मामला अब जांच के दायरे में आ गया है। इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन डॉक्टरों की कमेटी गठित की गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मोबाइल टॉर्च में सिजेरियन डिलीवरी: जांच के दायरे में अस्पताल प्रशासन
पलवल के जिला नागरिक अस्पताल में मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में एक गर्भवती महिला की सिजेरियन डिलीवरी किए जाने का मामला अब गंभीर जांच के घेरे में है। इस घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तीन डॉक्टरों की एक विशेष जांच समिति का गठन किया है, जो पूरे घटनाक्रम की बारीकी से पड़ताल करेगी।
जांच समिति सोमवार को ऑपरेशन थिएटर में मौजूद रहे डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, बिजली विभाग के कर्मचारियों और अन्य संबंधित कर्मियों के बयान दर्ज करेगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. सतेंद्र वशिष्ठ ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल के भीतर ऑपरेशन के दौरान वीडियो बनाना मरीज की निजता का उल्लंघन है और यह नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
तकनीकी खामी: इनवर्टर फेल होने से अंधेरे में हुआ ऑपरेशन
प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि ऑपरेशन के दौरान बिजली कटने के बाद इनवर्टर ने काम करना बंद कर दिया था। तकनीकी टीम की शुरुआती पड़ताल में पता चला है कि इनवर्टर की बैटरी के तारों पर कार्बन जमा होने के कारण कनेक्शन टूट गया था। अस्पताल के बिजली रखरखाव विभाग की इस लापरवाही के कारण आपातकालीन स्थिति में बैकअप बिजली नहीं मिल सकी। जनरेटर के ऑटो-स्टार्ट होने और बिजली आपूर्ति बहाल करने में करीब तीन मिनट का समय लगा, जिसके दौरान डॉक्टरों ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी में सर्जरी जारी रखी।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, गुरुवार रात करीब 10 बजे ऑपरेशन शुरू होते ही बिजली गुल हो गई थी। डॉक्टरों के सामने महिला और गर्भस्थ शिशु की जान बचाने की चुनौती थी, जिसे देखते हुए उन्होंने जोखिम उठाकर सर्जरी पूरी की। करीब 15 मिनट की इस प्रक्रिया के बाद मां और नवजात दोनों सुरक्षित बताए गए हैं। शनिवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने तक दोनों की स्थिति सामान्य बनी रही।
18 करोड़ के भवन में संसाधनों का अभाव
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अस्पताल के बुनियादी ढांचे पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से बने इस अस्पताल को हाल ही में 7.5 करोड़ रुपये की मरम्मत के बाद आधुनिक सुविधाओं से लैस होने का दावा किया गया था। अस्पताल की क्षमता भी 100 से बढ़ाकर 200 बेड कर दी गई है, लेकिन आपातकालीन बिजली बैकअप का विफल होना अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करता है।
अस्पताल में रोजाना औसतन 25 से 30 ऑपरेशन किए जाते हैं और लगभग दो हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। संसाधनों की कमी और तकनीकी खामियों के कारण मरीजों की सुरक्षा पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इससे पहले फरीदाबाद के एक अस्पताल में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जिसमें पार्किंग में प्रसव होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कदम उठाए थे।
आगे की कार्रवाई और जांच का दायरा
जांच समिति में डॉ. संजय, डॉ. सुरेश, डॉ. संदीप किशोर और एक वरिष्ठ नर्सिंग स्टाफ को शामिल किया गया है। समिति यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ऑपरेशन थिएटर के अंदर वीडियो किसने बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने के पीछे क्या मंशा थी। एनेस्थीसिया विभाग के एक डॉक्टर पर वीडियो बनाने का संदेह जताया जा रहा है।
सीएमओ ने स्वयं परिजनों से मिलकर स्थिति की समीक्षा की है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह मामला भविष्य में अस्पताल की बिजली आपूर्ति और रखरखाव प्रोटोकॉल में बड़े बदलाव का कारण बन सकता है, ताकि किसी भी मरीज को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!