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मुजफ्फरपुर: 26 साल पुराने किसान हत्याकांड में 12 दोषियों को उम्रकैद, सुनवाई के दौरान 5 की हुई मौत

Muzaffarpur court delivers verdict in 26-year-old farmer murder case. मामले में मंगवाल को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीष-2 दरशरथ मिश्र की अदालन ने 12 दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। मामला साल 2000 का है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

15 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1.2K
मुजफ्फरपुर: 26 साल पुराने किसान हत्याकांड में 12 दोषियों को उम्रकैद, सुनवाई के दौरान 5 की हुई मौत
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दो दशक से अधिक समय बाद मिला न्याय

मुजफ्फरपुर जिले के हथौड़ी थाना क्षेत्र के झौआ गांव में 26 साल पहले हुए एक किसान की हत्या के मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-2 दशरथ मिश्र की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में 12 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2000 का है, जब खेत की मेड़ काटने और धान उखाड़ने को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था।

घटना के दौरान किसान रामबहादुर राय की भाले से गोदकर हत्या कर दी गई थी। इस हमले में तीन अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हुए थे। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे न भरने पर उन्हें दो महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

लंबी कानूनी प्रक्रिया और आरोपियों की स्थिति

इस मामले की सुनवाई के दौरान कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। मुकदमे के दौरान कुल 5 आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि एक आरोपी राजीव कुमार को साक्ष्य के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया है। सजा पाने वाले 12 दोषियों में भूपेंद्र प्रसाद यादव, लोभित राय, सिकिंदर राय, सत्यनारायण राय, मुनिंद्र राय, नरेश राय, रामनाथ राय, अमृत राय, विनोद राय, मोहित राय, मनोज राय और देवनारायण राय शामिल हैं। इनमें से अधिकांश की उम्र 60 से 78 वर्ष के बीच है।

अदालत ने लोभित राय और भूपेंद्र प्रसाद यादव को सीधे तौर पर हत्या (आईपीसी धारा 302) का दोषी माना, जबकि अन्य 10 दोषियों को गैरकानूनी जमावड़े के माध्यम से हत्या में शामिल होने (धारा 302/149) के लिए सजा सुनाई गई है। शुरुआत में एफआईआर में 11 नामजद आरोपी थे, लेकिन सुनवाई के दौरान गवाहों के बयानों के आधार पर 7 और लोगों को इसमें जोड़ा गया था।

संघर्ष और कोर्ट परिसर में हंगामा

मृतक के भतीजे अरुण कुमार ने बताया कि उनका परिवार पिछले 26 वर्षों से न्याय के लिए संघर्ष कर रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपियों की ओर से उन्हें जमीन और धन का प्रलोभन देकर समझौता करने का दबाव बनाया गया था, लेकिन परिवार अपने रुख पर अडिग रहा। अदालत के फैसले के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है।

फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद कोर्ट परिसर में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच झड़प हो गई, जिसमें मृतक पक्ष के धर्मेंद्र यादव, अरुण कुमार और विजय राय के साथ मारपीट की गई। धर्मेंद्र यादव इस घटना में घायल हो गए। सूचना मिलते ही नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह घटना 13 अगस्त 2000 को हुई थी। खेत की मेड़ और फसल को लेकर उपजे विवाद में रामबहादुर राय पर लाठी, फरसा और गड़ासा से लैस लोगों ने हमला किया था। उनकी मौत घटनास्थल पर ही हो गई थी। मृतक के भाई जगरनाथ राय की शिकायत पर हथौड़ी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इतने वर्षों तक चले मुकदमे के बाद अब जाकर पीड़ित परिवार को न्याय मिल सका है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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