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मध्य प्रदेश: 70 हजार शिक्षकों को TET से राहत दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी राज्य सरकार

MP School Education Department preparing for Supreme Court, 60k teachers eligibility exam relief. स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2005 से 2009 के बीच ली गई भर्ती परीक्षा में शामिल 60 हजार शिक्षकों को परीक्षा से बचाने विभाग सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने की तैयारी में है। इस याचिका में कोर्ट को यह जानकारी दी जाएगी कि इन शिक्षकों ने सरकार द्वारा ली गई भर्ती परीक्षा उत्तीर्ण करके ही नौकरी हासिल की है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 494
मध्य प्रदेश: 70 हजार शिक्षकों को TET से राहत दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी राज्य सरकार
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पात्रता परीक्षा से छूट के लिए कानूनी रास्ता तलाश रहा शिक्षा विभाग

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग राज्य के करीब 70 हजार शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता से राहत दिलाने की तैयारी में है। विभाग इस संबंध में जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर करने जा रहा है। सरकार का मुख्य तर्क यह है कि वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त हुए इन शिक्षकों ने उस समय सरकारी चयन परीक्षा उत्तीर्ण की थी, जिसके आधार पर उन्हें सेवा में लिया गया था। विभाग का मानना है कि इन शिक्षकों को दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है।

यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें आरटीई (RTE) कानून लागू होने से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया था। लोक शिक्षण संचालनालय ने इस आदेश के अनुपालन में प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, सरकार अब उन शिक्षकों के लिए विशेष राहत मांग रही है जिनकी भर्ती पूर्व में आयोजित सरकारी परीक्षाओं के माध्यम से हुई थी।

व्यापमं के जरिए हुई थी इन शिक्षकों की भर्ती

वर्ष 2005-06 और 2008-09 के दौरान शिक्षकों की भर्ती तत्कालीन व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के माध्यम से की गई थी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इन शिक्षकों ने विधिवत परीक्षा प्रक्रिया पूरी की थी, हालांकि वह परीक्षा एनसीटीई (NCTE) के मानकों के अनुसार टीईटी नहीं थी। राज्य सरकार विधि विशेषज्ञों और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं से परामर्श लेने के बाद एक सप्ताह के भीतर याचिका दायर करने की योजना बना रही है।

हालांकि, विभागीय सूत्रों का यह भी मानना है कि इस याचिका पर राहत मिलने की संभावना सीमित है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर दायर की गई 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर चुका है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए शिक्षकों का निर्धारित मानकों को पूरा करना अनिवार्य है और इस शर्त में कोई ढील नहीं दी जा सकती।

परीक्षा की समय-सीमा और भविष्य की चुनौतियां

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को आंशिक राहत देते हुए टीईटी उत्तीर्ण करने की समय-सीमा को 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 तक कर दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो शिक्षक पहली बार में परीक्षा पास नहीं कर पाएंगे, उन्हें भविष्य में होने वाली परीक्षाओं में शामिल होने के अवसर मिलते रहेंगे। जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से कम बची है, उन्हें इस परीक्षा से छूट दी गई है।

शिक्षा विभाग के लिए अब चुनौती यह है कि वह निर्धारित समय-सीमा के भीतर परीक्षा आयोजित करे। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि आरटीई एक्ट के तहत सेवा में मौजूद शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता हासिल करना अनिवार्य है। संसद की मंशा यही थी कि सभी शिक्षक निर्धारित मानकों पर खरे उतरें। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि केवल नौकरी जाने के डर से इस अनिवार्यता को खत्म नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसका सीधा असर आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा पर पड़ेगा।

क्या है आरटीई एक्ट का प्रावधान

राइट ऑफ चिल्ड्रन टू फ्री एंड कंपल्सरी एजुकेशन (RTE) एक्ट के तहत यह स्पष्ट व्यवस्था है कि सेवा में कार्यरत शिक्षकों को भी तय समय के भीतर न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता हासिल करनी होगी। कोर्ट ने माना है कि एनसीटीई की अधिसूचनाएं मूल कानून से ऊपर नहीं हो सकतीं। इस कानूनी स्थिति के कारण राज्य सरकार के सामने अब सीमित विकल्प बचे हैं, जिसमें समय पर परीक्षा का आयोजन करना सबसे प्रमुख है।

फिलहाल, विभाग के अधिकारी इस मामले पर आधिकारिक टिप्पणी करने से बच रहे हैं क्योंकि मामला विचाराधीन है। राज्य सरकार की आगामी याचिका पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यदि कोर्ट इस पर कोई सकारात्मक रुख अपनाता है, तो हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है। अन्यथा, सभी प्रभावित शिक्षकों को आगामी समय-सीमा के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना ही होगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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