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मुरादाबाद: सील की गई 4 इमारतों को अस्थाई राहत, नापजोख के लिए खुलेगा ताला

Moradabad MDA 4 buildings seal temporary lift for compounding. मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) पिछले सप्ताह सील की गई 37 में से 4 बिल्डिंगों की सील अस्थाई रूप से खोलेगा।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

10 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 378
मुरादाबाद: सील की गई 4 इमारतों को अस्थाई राहत, नापजोख के लिए खुलेगा ताला
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मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) ने हाल ही में सील की गई अपनी 37 इमारतों में से 4 को अस्थाई रूप से खोलने का निर्णय लिया है। यह कदम उन भवन मालिकों को राहत देने के लिए उठाया गया है जो अपनी संपत्तियों का मानचित्र तैयार करवाकर नियमानुसार कंपाउंडिंग प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं। प्राधिकरण के इस फैसले से संबंधित संचालकों को अपनी इमारतों की सटीक नापजोख करने का अवसर मिलेगा।

केवल नापजोख के लिए मिलेगी अनुमति

एमडीए के उपाध्यक्ष अनुभव सिंह ने स्पष्ट किया है कि सील को हटाने का उद्देश्य केवल तकनीकी औपचारिकताएं पूरी करना है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इन इमारतों में किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि, जैसे कोचिंग संस्थान या अस्पताल का संचालन, पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सील खुलने का अर्थ यह कतई नहीं है कि वहां कामकाज शुरू करने की अनुमति दे दी गई है।

जिन चार इमारतों को अस्थाई रूप से खोलने की अनुमति दी गई है, उनमें तीन कोचिंग सेंटर—स्कॉलर्स डेन, जेनेसिस और अन-एकेडमिक—तथा दीपा हॉस्पिटल शामिल हैं। इन संचालकों ने प्राधिकरण से अनुरोध किया था कि उन्हें अपनी बिल्डिंग की पैमाइश करने का मौका दिया जाए ताकि वे मुरादाबाद महायोजना-2031 के तहत शमन मानचित्र प्रस्तुत कर सकें।

नियम उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई

प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि यदि निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि सील खुलने के बाद वहां कोचिंग या अस्पताल का संचालन किया जा रहा है, तो संबंधित भवन को तुरंत दोबारा सील कर दिया जाएगा। इसके अलावा, उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर विधिक कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। एमडीए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले दिनों लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में सुरक्षा मानकों को लेकर सख्ती बरती गई थी। इसी अभियान के तहत मुरादाबाद में भी उन इमारतों को चिन्हित कर सील किया गया था जिनके पास फायर एनओसी नहीं थी या जिनका उपयोग स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किया जा रहा था।

भविष्य की राह और प्रक्रिया

एमडीए की ओर से सभी सील इमारतों के स्वामियों को पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे अपनी संपत्ति को महायोजना-2031 के अनुरूप व्यवस्थित करें। जो भी भवन स्वामी अपनी बिल्डिंग का मानचित्र स्वीकृत कार्य के अनुसार ढालने और कंपाउंडिंग शुल्क जमा करने के लिए तैयार हैं, प्राधिकरण उनकी फाइलों पर नियमानुसार विचार कर रहा है।

आने वाले समय में अन्य सील इमारतों के मालिकों के लिए भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी, बशर्ते वे प्राधिकरण के नियमों का पालन करने का लिखित आश्वासन और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करें। फिलहाल, प्रशासन का पूरा ध्यान अवैध रूप से चल रहे संस्थानों को बंद रखने और शहर के विकास को नियोजित तरीके से आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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