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मीरी-पीरी संस्थान वेतन विवाद: कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, 48 घंटे का अल्टीमेटम

Haryana Sikh Gurudwara Management Committee (HSGMC) staff protest in Kurukshetra demanding salary. मीरी-पीरी सैलरी विवाद- CM से दखल की मांग. मीरी-पीरी संस्थान में 3 महीने की सैलरी नहीं मिलने पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे स्टाफ का सब्र अब जवाब देने लगा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 755
मीरी-पीरी संस्थान वेतन विवाद: कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, 48 घंटे का अल्टीमेटम
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कुरुक्षेत्र के शाहाबाद स्थित मीरी-पीरी संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे गया है। पिछले तीन महीनों से वेतन न मिलने के कारण संस्थान के कर्मचारी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर हैं। अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे कर्मचारियों ने अब सीधे हरियाणा के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि उनकी रुकी हुई सैलरी का भुगतान सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

कर्मचारी संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर मामले में दखल देने की अपील की है। समिति का तर्क है कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) का गठन राज्य सरकार की देखरेख में हुआ था और चुनाव भी सरकार द्वारा ही कराए गए थे। ऐसे में, कर्मचारियों का कहना है कि कमेटी द्वारा वेतन न देना सरकार की जिम्मेदारी के दायरे में आता है, इसलिए सरकार को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।

संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि जब तक वेतन उनके बैंक खातों में जमा नहीं हो जाता, तब तक उनका धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। हालांकि, संस्थान के सीईओ डॉ. संदीपइंद्र सिंह चीमा ने कर्मचारियों के बीच पहुंचकर सोमवार तक वेतन जारी कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन कर्मचारी अब केवल मौखिक वादों के बजाय ठोस कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

48 घंटे का अल्टीमेटम और घेराव की चेतावनी

कर्मचारियों ने HSGMC को 48 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। समिति के सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। इस कड़ी में बुधवार को कर्मचारी HSGMC के मुख्य दफ्तर का घेराव करने की योजना बना रहे हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।

दूसरी ओर, HSGMC के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने अपनी लाचारी जाहिर की है। उनका कहना है कि कमेटी का बजट अभी तक पास नहीं हुआ है, जिसके कारण वेतन जारी करने में तकनीकी और वित्तीय बाधाएं आ रही हैं। उन्होंने दफ्तर के घेराव को गैर-कानूनी बताते हुए कर्मचारियों से संयम बरतने की अपील की है।

SGPC और HSGMC के बीच कानूनी खींचतान

इस विवाद के पीछे एक बड़ी कानूनी पेच भी है। जगदीश सिंह झींडा ने स्पष्ट किया है कि संस्थान का पूर्ण नियंत्रण अभी तक HSGMC के पास नहीं आया है। यद्यपि 12 मई को हाईकोर्ट ने HSGMC के पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर दी है।

वर्तमान में मामला अदालत में विचाराधीन है और अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 को निर्धारित है। झींडा का तर्क है कि जब तक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक वित्तीय जिम्मेदारी SGPC की बनती है। इस कानूनी उलझन के बीच पिस रहे कर्मचारी अब सरकार से त्वरित समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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