महराजगंज: अमृत सरोवर में डूबने से तीन बच्चों की मौत, निर्माण कार्य की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
Tragic drowning incident at Maharajganj Siswa Amrit Sarovar site, corruption allegations and safety inquiry. महराजगंज में जल संरक्षण और विकास का प्रतीक बनने वाला अमृत सरोवर अब महराजगंज के सिसवा में हादसे की वजह बन गया। निर्माणाधीन अमृत सरोवर में डूबने से तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में जल संरक्षण के लिए बनाई जा रही अमृत सरोवर परियोजना एक बड़े हादसे का केंद्र बन गई है। सिसवा नगरपालिका क्षेत्र के मीराबाई नगर वार्ड में निर्माणाधीन इस सरोवर में डूबने से तीन किशोरों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि परियोजना की सुरक्षा मानकों को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
नहाने गए थे बच्चे, गहरे पानी में समाए
रविवार की दोपहर को चार बच्चे निर्माणाधीन सरोवर के पास पहुंचे थे। इनमें से तीन बच्चे नीतीश यादव (12), रोहन (13) और कृष्णा रौनियार (15) गहरे पानी में उतर गए और वापस नहीं लौट सके। उनके साथ मौजूद चौथा बच्चा राजबीर किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहा और उसने शोर मचाकर आसपास के लोगों को घटना की सूचना दी। स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस और गोताखोरों ने बच्चों को बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस दुखद घटना के बाद से ही इलाके में भारी आक्रोश है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और स्थानीय लोग निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही को इस हादसे का मुख्य कारण मान रहे हैं। सरोवर के चारों ओर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे, जिससे यह जगह बच्चों के लिए जानलेवा साबित हुई।
सुरक्षा और भ्रष्टाचार के घेरे में निर्माण कार्य
अमृत सरोवर परियोजना के तहत सुरक्षा मानकों का पालन न करना प्रशासन की बड़ी चूक मानी जा रही है। निर्माण स्थल पर न तो कोई बैरिकेडिंग की गई थी और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे। इसके अलावा, वहां किसी सुरक्षाकर्मी की तैनाती भी नहीं थी, जिससे कोई भी व्यक्ति आसानी से खतरनाक क्षेत्र तक पहुंच सकता था।
यह पहली बार नहीं है जब इस परियोजना पर विवाद हुआ है। इससे पहले 20 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी के पास निर्माण में भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के इस्तेमाल की शिकायतें पहुंची थीं। उस समय तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था, लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही यह हादसा हो गया, जिसने निर्माण की गुणवत्ता पर फिर से सवालिया निशान लगा दिए हैं।
प्रशासन की कार्रवाई और मुआवजे का ऐलान
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने स्वीकार किया कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। प्रशासन ने निर्माण एजेंसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से बैरिकेडिंग कराने को कहा गया है।
राज्य सरकार की ओर से मृतक बच्चों के परिवारों को दैवीय आपदा राहत निधि से चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि मुआवजा जान की भरपाई नहीं कर सकता, और असली न्याय तभी होगा जब लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह मामला सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सुरक्षा और जवाबदेही की एक बड़ी परीक्षा बन गया है। यदि जांच में भ्रष्टाचार या सुरक्षा मानकों की अनदेखी के ठोस सबूत मिलते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
