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मध्य प्रदेश में जल्द लागू होगा समान नागरिक संहिता, सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान

MP CM Mohan Yadav announces UCC bill implementation in monsoon session. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को कटनी में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ किया कि प्रदेश में जल्द ही यूसीसी लागू किया जाएगा।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

17 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 842
मध्य प्रदेश में जल्द लागू होगा समान नागरिक संहिता, सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कटनी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार आगामी मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश में कानून का शासन सर्वोपरि है और सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

एक विवाह का नियम और तीन तलाक पर सख्त रुख

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विवाह कानूनों में समानता पर विशेष बल दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक वर्ग के लिए एक विवाह का नियम है, तो दूसरे के लिए अलग व्यवस्था क्यों होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि राम एक विवाह कर सकता है, तो रहीम के लिए बहुविवाह की अनुमति का कोई औचित्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में केवल वही लोग रह पाएंगे जो कानून का पालन करेंगे और एक विवाह की प्रथा को स्वीकार करेंगे।

तीन तलाक के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह कुप्रथा अब समाप्त हो चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई भी व्यक्ति तीन तलाक का उपयोग करता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा और सीधे जेल भेजा जाएगा। उनका कहना था कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य है और यूसीसी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित होगा।

कैबिनेट में मसौदे को मंजूरी की तैयारी

यूसीसी को लागू करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने इस पर तेजी से काम किया है। भोपाल के जगदीशपुर में आयोजित होने वाली आगामी कैबिनेट बैठक में यूसीसी के मसौदे को औपचारिक मंजूरी दी जाएगी। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद इसे विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य राज्य में भेदभावपूर्ण कानूनों को समाप्त कर एक समान नागरिक व्यवस्था स्थापित करना है।

राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने पहले ही मुख्यमंत्री को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में अनुसूचित जनजातियों (ST) को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अनिवार्य पंजीकरण जैसे महत्वपूर्ण सुझाव शामिल किए गए हैं। जनसुनवाई के दौरान मिले सुझावों में मुस्लिम महिलाओं की ओर से भी यूसीसी के समर्थन में बड़ी संख्या में राय सामने आई है।

संवैधानिक पृष्ठभूमि और अन्य राज्यों की स्थिति

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के तहत समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है, जो सरकारों को देश भर में नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करने का मार्ग दिखाता है। वर्तमान में उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसे राज्यों ने पहले ही यूसीसी को अपना लिया है। अब मध्य प्रदेश भी इस सूची में शामिल होने की ओर अग्रसर है।

ऐतिहासिक रूप से, 1835 की ब्रिटिश रिपोर्ट से शुरू हुई यह मांग आजादी के बाद 1948 में हिंदू संहिता विधेयक के रूप में संविधान सभा के सामने आई थी। इसका मूल उद्देश्य बाल विवाह, सती प्रथा और अन्य सामाजिक कुरीतियों को समाप्त कर महिलाओं को समान अधिकार दिलाना था। अब मध्य प्रदेश सरकार इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए राज्य में एक नया कानूनी ढांचा तैयार करने की प्रक्रिया में है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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