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कानपुर: लापता व्यापारी का 27 दिन बाद मिला सुराग, पुलिस ने अज्ञात मानकर कर दिया था अंतिम संस्कार

कानपुर के सचेंडी थाना क्षेत्र की चकरपुर मंडी से दो जुलाई को रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए आलू व्यापारी का शव 27 दिन बाद पहचान में आने से पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। परिजनों का आरोप है कि गुमशुदगी दर्ज होने और मुकदमा कायम होने के बावजूद पुलिस व्यापारी की पहचान नहीं कर सकी और अज्ञात शव मानकर उसका अंतिम संस्कार करा दिया।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

1 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
कानपुर: लापता व्यापारी का 27 दिन बाद मिला सुराग, पुलिस ने अज्ञात मानकर कर दिया था अंतिम संस्कार
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27 दिन बाद सामने आई कड़वी सच्चाई

कानपुर के सचेंडी थाना क्षेत्र से लापता हुए एक आलू व्यापारी का मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। चकरपुर मंडी से दो जुलाई को रहस्यमय तरीके से गायब हुए व्यापारी देवेश शुक्ला की तलाश में जुटे परिजनों को 27 दिन बाद जो जानकारी मिली, उसने सबको स्तब्ध कर दिया। पुलिस ने जिस व्यक्ति को अज्ञात मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था, वह लापता देवेश ही थे।

परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने देवेश की गुमशुदगी दर्ज कराई थी और पुलिस ने इस मामले में मुकदमा भी दर्ज कर लिया था, तो फिर उनकी पहचान क्यों नहीं की गई। इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय व्यापारियों और पीड़ित परिवार में भारी आक्रोश व्याप्त है।

मुकदमा दर्ज होने के बाद भी नहीं सुलझी गुत्थी

जूही निवासी मनोज कुमार शुक्ला ने बताया कि उनके भाई देवेश शुक्ला दो जुलाई को चकरपुर मंडी स्थित अपनी आढ़त से अचानक लापता हो गए थे। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद पांच जुलाई को सचेंडी थाने में संजू पाल, मुंशी टिंकू यादव और एक अज्ञात ऑटो चालक के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। पुलिस ने संजू पाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन देवेश का पता लगाने में नाकाम रही।

शनिवार को जब परिजन किसी काम से कोतवाली पहुंचे, तो वहां लगे अज्ञात शवों के पोस्टर पर उनकी नजर पड़ी। फोटो और विवरण का मिलान करने पर उन्हें देवेश के होने का संदेह हुआ। जब इसकी पुष्टि हुई तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उन्हें पता चला कि जिसे पुलिस ने लावारिस समझकर अंतिम संस्कार कर दिया, वह उनके अपने थे।

अस्पताल में हुई थी मौत, पुलिस ने नहीं की शिनाख्त

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, तीन जुलाई को एक एंबुलेंस देवेश को गंभीर हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कल्याणपुर लेकर पहुंची थी। वहां से उन्हें उर्सला अस्पताल रेफर किया गया, जहां सात जुलाई को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। पनकी पुलिस ने शव की पहचान न हो पाने पर 10 जुलाई को अज्ञात मानकर उसका अंतिम संस्कार संपन्न करा दिया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में देवेश के सिर पर गंभीर चोट के निशान मिले हैं, जिससे यह मामला केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि संदिग्ध प्रतीत हो रहा है। परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस ने गुमशुदगी के रिकॉर्ड और अस्पतालों के डेटा का मिलान समय रहते किया होता, तो आज वे अपने परिजन का अंतिम संस्कार सम्मान के साथ कर पाते।

उच्च स्तरीय जांच की मांग

व्यापारी वर्ग ने इस मामले में पुलिस की घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। व्यापारियों का कहना है कि समन्वय की कमी के कारण एक परिवार को अपने सदस्य के अंतिम दर्शन तक नसीब नहीं हुए। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है ताकि दोषियों को सजा मिल सके।

डीसीपी वेस्ट एस.एम. कासिम आबिदी ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि पूरे घटनाक्रम की जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया है कि यदि जांच में किसी भी पुलिसकर्मी की लापरवाही या कोताही सामने आती है, तो उनके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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