गोंडा: घाघरा नदी का जलस्तर घटने से बढ़ा कटाव का खतरा, 10 बीघा जमीन नदी में समाई
Gonda Ghaghara river erosion causes land loss and migration. गोंडा जिले में घाघरा नदी का जलस्तर बीते 24 घंटे से तेजी से घट रहा है। जलस्तर घटने के कारण करनैलगंज और तरबगंज तहसील क्षेत्रों के तटीय इलाकों में नदी की कटान फिर तेज हो गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

घाघरा के घटते जलस्तर ने बढ़ाई ग्रामीणों की चिंता
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में घाघरा नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटों के दौरान तेजी से नीचे आया है। जलस्तर में 5 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है, जिसके चलते करनैलगंज और तरबगंज तहसील के तटीय इलाकों में नदी का कटाव एक बार फिर विकराल रूप ले चुका है। नदी का पानी घटने के साथ ही किनारों की मिट्टी का धंसना तेज हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल है।
सोमवार सुबह 9 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 11 सेंटीमीटर नीचे दर्ज किया गया। हालांकि जलस्तर में गिरावट जारी है, लेकिन कटाव की रफ्तार ने प्रशासन और ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। पिछले एक दिन में ही करीब 10 बीघा उपजाऊ कृषि भूमि और तैयार फसलें नदी के आगोश में समा चुकी हैं।
आशियानों पर मंडराया संकट, पलायन को मजबूर ग्रामीण
नदी के किनारे बसे कई गांवों में बने फूस के मकान अब कटाव की सीधी जद में आ गए हैं। जमीन कटने के कारण ग्रामीणों के सामने अपने घरों को छोड़ने का संकट खड़ा हो गया है। कई परिवार अपना सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित लोगों की मदद के लिए नावों की व्यवस्था की है ताकि आवागमन सुगम बना रहे।
विभिन्न बैराजों से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा पर भी नजर रखी जा रही है। सुबह 9 बजे की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरजा बैराज से 1,37,234 क्यूसेक, शारदा बैराज से 1,09,035 क्यूसेक और सरयू बैराज से 5,407 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच नदी की धारा का रुख किनारों की ओर होने से कटाव की तीव्रता बढ़ गई है।
प्रशासनिक राहत और बचाव के प्रयास
जिला प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा विभाग की टीमें लगातार प्रभावित गांवों का दौरा कर रही हैं। इन टीमों द्वारा ग्रामीणों और उनके पशुओं की स्वास्थ्य जांच की जा रही है और आवश्यक दवाइयां वितरित की जा रही हैं। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे नदी के किनारे से हटकर सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर चले जाएं।
बाढ़ खंड विभाग और स्थानीय ग्रामीण मिलकर कटाव को रोकने के लिए पारंपरिक तरीके अपना रहे हैं। नदी के किनारों पर पेड़ और खर-पतवार लगाकर कटाव को थामने की कोशिश की जा रही है, हालांकि नदी का निचला हिस्सा लगातार कट रहा है, जिससे इन प्रयासों की सफलता सीमित बनी हुई है।
मुआवजे का आश्वासन और भविष्य की स्थिति
गोंडा के जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश कुमार श्रीवास्तव ने स्थिति पर जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन किसानों की फसलें और जमीन नदी में समाई हैं, उन्हें नियमानुसार आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाएगा। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि इस कठिन समय में सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है।
आने वाले दिनों में जलस्तर की स्थिति और कटाव की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। फिलहाल, नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए सतर्कता बरतना ही सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है, जबकि जिला प्रशासन स्थिति पर निरंतर नजर बनाए हुए है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
