गोरखपुर: सोशल मीडिया पर व्यूज पाने के लिए बनाया पुलिसकर्मी को पीटने का फर्जी वीडियो, दो गिरफ्तार
पुलिस टीम ने जब इस वायरल वीडियो की जांच की तो फेक निकला। लाइक और व्यूज पाने की चक्कर में वीडियो बनाया गया है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ फर्जी वीडियो
गोरखपुर में हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक युवक को दरोगा की वर्दी पहने व्यक्ति की जूते से पिटाई करते हुए देखा गया। इस वीडियो के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। वीडियो में दोनों के बीच सड़क पर जमकर हाथापाई होती दिखाई दे रही थी, जिससे आम जनता के बीच पुलिस की छवि धूमिल होने का खतरा पैदा हो गया था।
वीडियो में एक युवक पुलिसकर्मी को गालियां देते हुए अपने पिता को थाने ले जाने का आरोप लगा रहा था। वहीं, वर्दीधारी व्यक्ति भी उसे पलटकर जवाब देते हुए हाथापाई पर उतारू हो गया। इस पूरे घटनाक्रम को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे यह कोई वास्तविक विवाद हो, लेकिन पुलिस की गहन जांच के बाद पूरी सच्चाई सामने आई।
जांच में निकला फर्जी, व्यूज के लिए रचा गया नाटक
मामले की गंभीरता को देखते हुए शाहपुर पुलिस और साइबर सेल ने तुरंत जांच शुरू की। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि वायरल हो रहा वीडियो पूरी तरह से फर्जी और स्क्रिप्टेड था। वीडियो में जिस व्यक्ति ने दरोगा की वर्दी पहनी थी, वह असल में पुलिस विभाग का कर्मचारी नहीं है। इसी तरह, पिटाई करने वाला युवक भी किसी वास्तविक विवाद का हिस्सा नहीं था।
पुलिस के अनुसार, यह पूरा ड्रामा केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अधिक लाइक्स और व्यूज बटोरने के उद्देश्य से रचा गया था। आरोपियों ने पुलिस और वकीलों की छवि को नुकसान पहुंचाने की नीयत से इस भ्रामक वीडियो को प्रसारित किया था, ताकि लोग इसे असली घटना मानकर साझा करें।
दो आरोपी हिरासत में, सख्त कार्रवाई की तैयारी
एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो युवकों को हिरासत में लिया है। शाहपुर थाने में आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तरह के वीडियो बनाने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य क्या था और क्या इसमें कोई और भी शामिल है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर भ्रामक तथ्यों के जरिए अफवाह फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि किए बिना उस पर विश्वास न करें और न ही उसे आगे बढ़ाएं।
इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर कंटेंट क्रिएशन के नाम पर की जा रही गैर-जिम्मेदाराना हरकतों पर बहस छेड़ दी है। पुलिस अब ऐसे लोगों पर कड़ी नजर रख रही है जो अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए कानून व्यवस्था और सरकारी संस्थानों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।
आने वाले दिनों में पुलिस इस मामले में चार्जशीट दाखिल करेगी और अदालत के जरिए आरोपियों को सजा दिलाने का प्रयास करेगी। यह मामला उन सभी लोगों के लिए एक सबक है जो इंटरनेट पर सनसनी फैलाने के लिए फर्जी वीडियो का सहारा लेते हैं।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!